पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है, जहां दो नए संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की एम्स कल्याणी स्थित प्रयोगशाला में इन दोनों सैंपलों की प्रारंभिक जांच की गई, जिसके बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम राज्य के लिए रवाना कर दी।

निपाह वायरस को उच्च मृत्यु दर वाली संक्रामक बीमारी माना जाता है और इसके तेज़ी से फैलने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात समीक्षा बैठक की। बैठक में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य को हर संभव सहयोग देने का भरोसा जताया।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालात से निपटने के लिए राष्ट्रीय संयुक्त महामारी प्रतिक्रिया दल को पश्चिम बंगाल भेजा गया है। इस टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (चेन्नई) और दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनके साथ एम्स कल्याणी के चिकित्सक और पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञ भी जुड़े हैं। यह टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर निगरानी, सैंपल जांच, संक्रमण की रोकथाम और मरीजों के इलाज से जुड़े उपायों में सहयोग कर रही है।

इधर, स्वास्थ्य मंत्रालय ने निपाह वायरस को लेकर पहले से जारी दिशा-निर्देशों को दोबारा लागू करते हुए पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, दिल्ली स्थित पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर राज्य को केंद्र की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है।

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जो मनुष्यों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में परेशानी और दिमाग में सूजन जैसी जटिल समस्याएं पैदा कर सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क से फैल सकता है, इसलिए समय रहते इसकी पहचान, निगरानी और नियंत्रण बेहद आवश्यक माना जाता है।