राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में भारतीय नौसेना की स्वदेशी अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर के भीतर समुद्र के नीचे यात्रा की। इस उपलब्धि के साथ वह पनडुब्बी में सफर करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने आईएनएस सिंधु रक्षक में पनडुब्बी यात्रा की थी।

नौसेना सूत्रों के अनुसार, इस विशेष यात्रा के दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी राष्ट्रपति के साथ मौजूद थे। यह यात्रा कर्नाटक स्थित करवार नौसैनिक अड्डे से संचालित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी के जरिए की गई। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर भी होती हैं।

नौसैनिक वर्दी में राष्ट्रपति मुर्मू ने पनडुब्बी में प्रवेश से पहले वहां तैनात अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की। उन्होंने आईएनएस वाघशीर के चालक दल से संवाद किया और उनके अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने इस स्वदेशी पनडुब्बी को भारतीय नौसेना की उच्च पेशेवर क्षमता और युद्ध के लिए तैयार रहने की भावना का सशक्त प्रतीक बताया।

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति को पनडुब्बी बेड़े की रणनीतिक भूमिका, उसकी परिचालन दक्षता और भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में उसके योगदान के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया। चालक दल से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने नौसैनिकों की निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि आईएनएस वाघशीर राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

आईएनएस वाघशीर, परियोजना पी-75 स्कॉर्पीन के तहत विकसित की गई छठी और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे इसी वर्ष जनवरी में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। नौसेना अधिकारियों के अनुसार, यह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी दुनिया की सबसे शांत और प्रभावी पनडुब्बियों में गिनी जाती है। इसे सतह और पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया मिशन, समुद्री निगरानी और विशेष अभियानों जैसे बहुआयामी कार्यों के लिए तैयार किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों के साथ ऐतिहासिक अनुभव साझा किए हैं। अक्तूबर में उन्होंने अंबाला एयरबेस से राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और वह दो अलग-अलग प्रकार के फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले अप्रैल 2023 में उन्होंने तेजपुर एयरबेस से सुखोई-30 एमकेआई विमान में भी उड़ान भरी थी।