अभिषेक बनर्जी की बागी नेताओं को खुली चुनौती, बोले- ममता के पास लौटे तो दे दूंगा इस्तीफा

HIGHLIGHTS
- अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आते हैं तो वह एक घंटे में इस्तीफा दे देंगे।
- टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले नेता भाजपा के दबाव में उसके अनुसार बयान दे रहे हैं और ईडी-सीबीआई के डर से कुछ नेताओं ने रास्ता बदला है।
- अभिषेक बनर्जी ने अपने कार्यालय पर हुई कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना बताया और मामले को हाई कोर्ट व जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कही।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं और सांसदों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर ये नेता दोबारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी में वापस आते हैं, तो वह केवल एक घंटे के अंदर अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता कर लिया है और अब उसी की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ नेता भाजपा के दबाव में उन्हें निशाना बना रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "अगर आपको पुलिस और जांच एजेंसियों से बचना है तो भाजपा की स्क्रिप्ट के अनुसार अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाना होगा और उनके खिलाफ बोलना होगा। तभी आपको राहत मिलेगी।"
2024 की जीत का श्रेय भी मिलना चाहिए: अभिषेक
टीएमसी सांसद ने कहा कि कुछ नेता 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी छोड़कर चले गए। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी की हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी की 29 सीटों की जीत का श्रेय भी उन्हें मिलना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "अगर अभिषेक बनर्जी हार के लिए जिम्मेदार हैं तो फिर 2024 की जीत का श्रेय भी मुझे मिलना चाहिए। क्या मेरे विरोधी इसे स्वीकार करेंगे?"
बागी सांसदों और विधायकों को दी वापसी की चुनौती
अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि अब तक करीब 60 विधायक और 20 सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनसे परेशानी है तो वे ममता बनर्जी के पास वापस लौट सकते हैं।
उन्होंने कहा, "आप दोपहर तीन बजे वापस आइए, मैं शाम चार बजे इस्तीफा दे दूंगा। मुझे पद की चिंता नहीं है, मेरी चिंता पार्टी और जनता है।"
ईडी-सीबीआई के डर से पार्टी छोड़ने वालों पर हमला
अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों के डर से पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कोई गलत काम नहीं किया है तो उसे जांच का सामना करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें भी कई बार सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों ने बुलाया है और उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन वह कभी पीछे नहीं हटे।
अभिषेक ने कहा कि ईडी या सीबीआई से बचना उनके लिए प्राथमिकता नहीं है। जनता का विश्वास ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है और लोकतंत्र में वह सिर्फ जनता के सामने जवाबदेह हैं।
पार्टी कार्यालय पर कार्रवाई को बताया राजनीतिक बदला
अभिषेक बनर्जी ने अपने पार्टी कार्यालय पर बूथ कैप्चरिंग के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर कार्यालय का इस्तेमाल चुनावी गड़बड़ी के लिए किया गया होता तो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग इसे साबित करता।
उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालय पर कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई। उनके अनुसार, कार्रवाई के दौरान भाजपा के झंडे और भगवा गमछे लिए लोग परिसर में पहुंचे और फर्नीचर समेत अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह कलकत्ता हाई कोर्ट जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी रुख करेंगे, ताकि कार्रवाई के दौरान कानून के दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कदम उठाया जा सके।
सौगत रॉय ने भी कार्रवाई का किया विरोध
टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने भी अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक और पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाने का प्रयास है।
प्रशासन ने कार्रवाई को बताया नियमों के तहत
इससे पहले दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। प्रशासन का कहना है कि कार्यालय को कथित अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था, लेकिन तय समय सीमा में कोई प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल नहीं हुआ।
इसके बाद सरकारी नियमों के अनुसार बेदखली की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
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