आरजी कर पीड़िता की अंत्येष्टि मामले में निर्मल घोष गिरफ्तार, अदालत ले जाते समय भीड़ ने पीटा

HIGHLIGHTS
- निर्मल घोष को एक दिन पहले ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था।
- पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें खड़दह थाने से अदालत ले जाया जा रहा था।
- भीड़ ने घोष पर लात-घूंसों से हमला किया और अंडे व कीचड़ फेंका।
कोलकाता। आरजी कर अस्पताल की दुष्कर्म-हत्या पीड़िता की कथित जल्दबाजी में अंत्येष्टि का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मामले में गिरफ्तार पूर्व टीएमसी विधायक निर्मल घोष पर शुक्रवार को उत्तर 24 परगना जिले में भीड़ ने हमला कर दिया। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बावजूद लोगों ने उन्हें लात-घूंसों से पीटा और जूते, अंडे व कीचड़ भी फेंका। घोष को एक दिन पहले ओडिशा से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन विधायक के तौर पर पीड़िता के शव की जल्दबाजी में अंत्येष्टि कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया।
पुलिस थाने के बाहर भीड़ ने किया हमला
घोष को खड़दह पुलिस थाने से बैरकपुर उपमंडलीय अदालत ले जाया जा रहा था। इसी दौरान थाने के बाहर जमा भीड़ ने उन्हें घेर लिया। पुलिस और आरएएफ के जवानों ने सुरक्षा घेरा बना रखा था और उनके सिर को हेलमेट से ढक दिया गया था। इसके बावजूद भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।
घोष के सफेद कुर्ते पर कीचड़ और अंडे के निशान दिखाई दिए। बैरकपुर अदालत में भी उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें देखकर ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। पुलिस ने किसी तरह उन्हें अदालत की हवालात तक पहुंचाया।
दूसरे आरोपी संजीब मुखर्जी के साथ भी हुआ विरोध
मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी संजीब मुखर्जी के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया। वह पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व पार्षद और घोष के करीबी सहयोगी बताए जाते हैं।
पुलिस जब उन्हें अदालत ले जाने वाली गाड़ी तक पहुंचा रही थी, तभी भीड़ ने उन्हें भी घेर लिया। आरोप है कि डॉक्टर के शव को पोस्टमार्टम के बाद पानीहाटी श्मशान घाट ले जाए जाने के दौरान मुखर्जी वहां मौजूद थे।
मामले का तीसरा आरोपी पानीहाटी नगरपालिका का पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ डे अभी फरार है। पुलिस के अनुसार, उसकी तलाश जारी है।
क्या है जल्दबाजी में अंत्येष्टि का मामला?
पीड़िता के पिता ने सोमवार को नई शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में प्राथमिकी में बदल दिया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि घोष समेत तीन लोगों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर परिवार की इच्छा के खिलाफ शव की जल्दबाजी में अंत्येष्टि कराई।
मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को पीड़िता की दूसरी बरसी पर आयोजित स्मृति कार्यक्रम में बैरकपुर पुलिस आयुक्त को नई जांच शुरू करने का निर्देश दिया था। यह पहल इसलिए अहम मानी गई क्योंकि कथित जल्दबाजी में अंत्येष्टि का पहलू सीबीआई की चल रही जांच के दायरे से बाहर रहा था।
पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि अंत्येष्टि इतनी जल्दी कराई गई कि दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना ही खत्म हो गई। उनका कहना है कि दोबारा पोस्टमार्टम से उनकी बेटी के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या से जुड़े अहम तथ्य सामने आ सकते थे।
पुलिस दोनों गिरफ्तार टीएमसी नेताओं को शुक्रवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस उनकी 14 दिन की हिरासत मांग सकती है।
पूरे मामले की नई जांच पीड़िता के पिता की ताजा शिकायत के बाद शुरू हुई है। अब जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि शव की अंत्येष्टि इतनी जल्दबाजी में क्यों की गई और इसमें आरोपियों की क्या भूमिका थी।
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