पेपर लीक पर CJP का सरकार से सवाल, बोले- सिर्फ सजा नहीं रोकथाम पर भी हो ध्यान

HIGHLIGHTS
- CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने पेपर लीक रोकने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
- उन्होंने संशोधित विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ सजा और जुर्माने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
- रांका ने NTA सुधार, परीक्षा में पारदर्शिता और पूरे परीक्षा तंत्र की जांच समेत पांच सूत्रीय मांगें रखीं।
नई दिल्ली। परीक्षा प्रणाली में पेपर लीक की समस्या को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संसद में पारित संशोधित विधेयक पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि केवल सजा और जुर्माने का प्रावधान करने के बजाय पेपर लीक रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएं।
आशुतोष रांका ने सरकार पर उठाए सवाल
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो जारी कर सवाल किया कि क्या वास्तव में पेपर लीक रोकने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संसद में पारित विधेयक में एक बड़ी कमी है। सरकार पेपर लीक के बाद की कार्रवाई जैसे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सजा और जुर्माने की बात कर रही है, लेकिन पेपर लीक को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
सीजेपी नेता ने कहा कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
पांच सूत्रीय मांगों का किया जिक्र
आशुतोष रांका ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार, परीक्षा कार्यक्रम और कैलेंडर में पारदर्शिता, पाठ्यक्रम में स्पष्टता, कोचिंग सेंटरों की व्यवस्था पर चर्चा और डिजिटल जांच जैसे मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पूरे परीक्षा तंत्र की शुरुआत से अंत तक जांच कर उसे मजबूत बनाने की जरूरत है। उनके अनुसार, जब तक परीक्षा व्यवस्था के ढांचे में सुधार नहीं होगा, तब तक पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा।
रांका ने आरोप लगाया कि सरकार केवल पेपर लीक होने के बाद की प्रक्रिया पर ध्यान दे रही है, जबकि जरूरत इसे रोकने के तरीकों पर चर्चा करने की है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों, शिक्षाविदों और साइबर सुरक्षा समेत अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों से बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को जल्दबाजी में फैसले नहीं लेने चाहिए, क्योंकि यह देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
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