कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ का भाजपा पर तीखा हमला, सरकारी स्कूलों में एंट्री बैन को बताया तानाशाही

HIGHLIGHTS
- हरियाणा के बढ़ते कर्ज को लेकर जस्सी पेटवाड़ ने सरकार से सवाल किया।
- 12 साल में प्रदेश का कर्ज 5.56 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का दावा।
- सरकारी स्कूलों में एंट्री बैन को विधायक ने तानाशाही बताया।
नारनौंद से कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने मानसून सत्र का लेखा-जोखा पेश करते हुए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने प्रदेश पर बढ़ते कर्ज, सरकारी स्कूलों में पाबंदियों, हरियाणा कौशल रोजगार निगम, कर्मचारियों और खिलाड़ियों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। साथ ही उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु पर भी तंज कसा।
12 साल में कर्ज 70 हजार करोड़ से बढ़कर 5.56 लाख करोड़ पहुंचा
विधायक जस्सी पेटवाड़ ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 1966 से 2014 तक, यानी करीब 48 वर्षों में, हरियाणा पर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। वहीं, पिछले 12 वर्षों के दौरान यह कर्ज बढ़कर 5 लाख 56 हजार 623 करोड़ रुपये हो गया।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि करीब 4.86 लाख करोड़ रुपये का जो अतिरिक्त कर्ज बढ़ा है, आखिर वह कहां खर्च किया गया।
सीएम नायब सैनी पर कटाक्ष, बोले- 'बिना पानी पिए चलाते हैं झूठ की रेल'
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर जुबानी हमला करते हुए जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि हरियाणा में अपराध लगातार बढ़ रहा है और सरकार इसे रोकने में नाकाम रही है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पंजाब जाकर नशा और अपराध मुक्त पंजाब बनाने की बातें कर रहे हैं।
तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "अगर बिना पानी पिए कोई झूठ की रेल चला सकता है, तो वह मुख्यमंत्री नायब सैनी हैं। झूठ बोलने में उन्होंने इतिहास रचा है। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने हरियाणा को ही छोड़ दिया हो।"
सरकारी स्कूलों में एंट्री बैन को बताया तानाशाही
हांसी में सरकारी स्कूलों में बाहरी निजी स्कूलों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर विधायक ने इसे सरासर तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि कमियों को छिपाने के बजाय सरकार को स्कूलों की स्थिति में सुधार करना चाहिए।
उन्होंने दो-टूक कहा, "प्रतिबंध लगाना गलत है। मैं खुद हलके के सरकारी स्कूलों का दौरा करूंगा, सरकार को जो करना है कर ले।"
हरियाणा कौशल रोजगार निगम, कर्मचारी और खेल बजट पर घेरा
रोजगार: सरकार ने 1.24 लाख कच्चे कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने का दावा किया, लेकिन विभागों से लगातार कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। 'बिना पर्ची-बिना खर्ची' का दावा खोखला साबित हुआ है।
कर्मचारी व खेल: सफाई कर्मचारियों और गेस्ट टीचरों की आवाज दबाई जा रही है। देश को सबसे ज्यादा पदक देने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों को उनके हक का खेल बजट नहीं मिल रहा।
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