CRPF जवानों को मिल सकते हैं पदोन्नति के दो अतिरिक्त मौके, पुरानी रैंक बहाल करने पर विचार

HIGHLIGHTS
- CRPF मुख्यालय ने फील्ड इकाइयों से दो दिनों के भीतर जवानों की राय लेने को कहा है।
- गृह मंत्रालय के आदेश के बाद 1997 में दोनों रैंक समाप्त कर दी गई थीं।
- मौजूदा व्यवस्था में कांस्टेबलों की पहली पदोन्नति में औसतन 22 से 25 साल लगते हैं।
नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) करीब 30 साल पहले समाप्त की गई ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ जैसी सैन्य रैंकों को दोबारा लागू करने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य जवानों की पदोन्नति में होने वाली देरी को कम करना और सेना से रिटायर होने वाले अग्निवीरों के लिए नए अवसर तैयार करना है।
CRPF में दोबारा लागू हो सकती हैं पुरानी रैंक
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, CRPF मुख्यालय ने देशभर में अपनी सैकड़ों फील्ड इकाइयों को दो दिनों के भीतर सैनिक सम्मेलन या हितधारकों की बैठकें आयोजित करने और इस प्रस्ताव पर जवानों की राय लेने को कहा है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ रैंक दोबारा लागू करने से कांस्टेबलों को हेड कांस्टेबल बनने से पहले पदोन्नति के दो अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं। इससे जवानों की शिकायतें दूर करने के साथ उनका मनोबल बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
गृह मंत्रालय के एक आदेश के तहत वर्ष 1997 में CRPF से इन दोनों रैंकों को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद इन्हें पुलिस के कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल रैंक में मिला दिया गया। हालांकि, सेना में ये दोनों रैंक अब भी मौजूद हैं।
अग्निवीरों के लिए भी आकर्षक बन सकती है CRPF की सेवा
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्ताव का एक उद्देश्य CRPF में सेवा को अग्निवीरों के लिए आकर्षक बनाना भी है। अग्निवीरों का पहला बैच इस साल के अंत में रिटायर होना शुरू होगा। इसके बाद वे CRPF समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में शामिल होने के पात्र होंगे।
अग्निवीर केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ योजना’ के तहत तीनों सेनाओं में चार साल के लिए भर्ती किए जाने वाले अल्पकालिक सैन्य कर्मी हैं।
फिलहाल, CAPF में एक अस्थायी व्यवस्था के तहत कांस्टेबलों की वर्दी पर ‘सीनियर कांस्टेबल’ का रैंक लगाया जाता है। यह आधिकारिक रूप से स्वीकृत रैंक नहीं है, लेकिन इसे ‘लांस नायक’ के बराबर माना जाता है। वहीं, ‘नायक’ रैंक के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है।
‘एक्स-पैरामिलिट्री पर्सनल एसोसिएशन’ के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि प्रस्तावित योजना से जवानों को तभी वास्तविक लाभ मिलेगा, जब पदोन्नति समयबद्ध तरीके से हो। ऐसा नहीं होने पर पूरी कवायद बेकार साबित हो सकती है।
CRPF के एक वरिष्ठ कमांडेंट ने भी कहा कि सेना की इन दोनों रैंकों को फिर से लागू करने का कदम केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ बटालियन में अनुशासन बनाए रखना भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कैसे होती है CRPF में पदोन्नति?
पदोन्नति के मौजूदा पदानुक्रम के अनुसार, कांस्टेबल के रूप में बल में शामिल होने वाले जवान को पांच साल में पहली पदोन्नति ‘लांस नायक’ के रूप में मिलती है। इसके बाद दस साल में ‘नायक’ और 20 साल में ‘हेड कांस्टेबल’ के पद पर पदोन्नति होती है।
करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले CRPF में पदोन्नति को लेकर लंबे समय से ठहराव की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल, एक कांस्टेबल को पहली पदोन्नति मिलने में औसतन 22 से 25 साल लग जाते हैं।
एक ही रैंक पर लंबे समय तक बने रहने से जवानों में असंतोष पैदा हो सकता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए नियमों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।
CRPF और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में पहले सेना की इन्फैंट्री बटालियनों की तरह ये दोनों रैंक मौजूद थीं। एक वरिष्ठ कमांडेंट के मुताबिक, वर्तमान में 1,000 से अधिक पुरुषों और महिलाओं वाली एक बटालियन में 20 से ज्यादा अधीनस्थ अधिकारी होते हैं। ऐसे में किसी भी नई नीति को तैयार करते समय यूनिट की संगठनात्मक संरचना और कार्यक्षमता का ध्यान रखना जरूरी है।
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