फ्लाइट टिकट के मनमाने किराये पर लगेगी लगाम? नए नियमों को मिली मंजूरी

HIGHLIGHTS
- मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, आर. महादेवन और अपरेश कुमार सिंह की पीठ कर रही है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से अगली सुनवाई में नियम पेश करने को कहा गया है।
- सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने स्वतंत्र विमानन नियामक बनाने की मांग की है।
नई दिल्ली। देश के विमानन क्षेत्र को विनियमित और नियंत्रित करने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि संबंधित नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। इन्हें प्रकाशित होने में करीब दो सप्ताह लग सकते हैं।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने अदालत को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत तैयार किए गए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ कर रही है। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से अगली सुनवाई में भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के नियम पेश करने को कहा।
16 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई की शुरुआत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नियमों को मंजूरी मिल गई है और इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की संभावना है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता की याचिका पर सुनवाई
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने विमानन क्षेत्र के संचालन के लिए एक स्वतंत्र नियामक स्थापित करने की मांग की है। यात्रियों की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह याचिका दायर की गई है।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराये में भारी बढ़ोतरी किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के लिए सख्त दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग लंबे समय से उठ रही है।
नियम तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी
इससे पहले 17 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नियम तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उस दौरान सरकार ने सीलबंद लिफाफे में नियमों का मसौदा अदालत के सामने रखा था और बताया था कि कुछ अंतिम चर्चाएं अभी बाकी हैं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराये को तर्कसंगत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर यात्रियों को राहत देने की दिशा में कदम उठाने की बात भी कही थी।
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