ई-चालान में हेराफेरी कर निजी Google Pay पर लिए 20 हजार, बर्खास्त कांस्टेबल की अपील खारिज

HIGHLIGHTS
- हिमाचल हाईकोर्ट ने बर्खास्त कांस्टेबल की अपील खारिज की।
- ई-चालान में बदलाव कर निजी Google Pay खाते में 20 हजार रुपये लेने का आरोप।
- दिसंबर 2023 में बिलासपुर के एसपी ने कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त किया था।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ई-चालान में कथित हेराफेरी कर रिश्वत की रकम अपने निजी Google Pay खाते में लेने वाले बर्खास्त कांस्टेबल की अपील खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की दोबारा जांच कराने के अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को बरकरार रखा है।
मामले में संबंधित कांस्टेबल बिलासपुर जिले में ट्रैफिक क्लर्क के पद पर तैनात था। तीन मई 2023 को ट्रैफिक पुलिस ने एक वाहन का ड्रिंक एंड ड्राइव के तहत चालान किया था। यह चालान पुलिस स्तर पर समझौते के जरिए निपटाया नहीं जा सकता था।
आरोप है कि कांस्टेबल ने उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना ऑनलाइन ई-चालान एप में बदलाव किए। उसने कोर्ट में जमा होने वाले जुर्माने की राशि को शून्य और 5,000 रुपये दर्शाया, जबकि वाहन चालक से उसके वकील के माध्यम से 20,000 रुपये अपने निजी Google Pay खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जांच में सामने आया कि यह रकम सरकारी खजाने में जमा नहीं कराई गई थी।
इसके बाद कांस्टेबल के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। प्रारंभिक जांच के बाद दिसंबर 2023 में बिलासपुर के एसपी ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
डीआईजी ने तकनीकी खामी के आधार पर दोबारा जांच के दिए थे आदेश
बर्खास्तगी के फैसले के खिलाफ कांस्टेबल ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), मंडी के समक्ष अपील की थी। डीआईजी ने पाया कि विभागीय कार्रवाई में पंजाब पुलिस रूल्स के नियम 16.38 का तकनीकी रूप से पालन नहीं किया गया था।
इस खामी के आधार पर डीआईजी ने पहले की विभागीय जांच को रद्द कर दिया और नियम 16.38 के तहत नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया। कांस्टेबल ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
उसकी ओर से दलील दी गई कि जब एक बार विभागीय जांच रद्द की जा चुकी है, तो दोबारा जांच नहीं कराई जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने खारिज की कांस्टेबल की दलील
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कांस्टेबल की दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर पिछली जांच रद्द होने का यह अर्थ नहीं है कि आरोपी को आरोपों से क्लीन चिट मिल गई है।
खंडपीठ ने मामले की नए सिरे से जांच कराने के अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए कांस्टेबल की अपील खारिज कर दी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.