अवैध घुसपैठियों को बसाने वाले नेटवर्क पर ED का बड़ा एक्शन, 5 राज्यों में छापेमारी

HIGHLIGHTS
- ED ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को भारत में बसाने वाले कथित नेटवर्क के खिलाफ पांच राज्यों में बड़ी कार्रवाई की है।
- जांच एजेंसी ने यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र के 13 ठिकानों पर छापेमारी कर नकदी, सोना, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
- मामला यूपी ATS की FIR पर आधारित है, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, अवैध घुसपैठियों को बसाने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध रूप से भारत में दाखिल बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या शरणार्थियों को बसाने वाले कथित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में एक साथ छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं।
जांच एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क विदेशों से आने वाले धन का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों के लिए फर्जी पहचान पत्र तैयार कराने, उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने और रहने-खाने की व्यवस्था करने में कर रहा था। अधिकारियों ने इस मामले में संभावित आतंकी फंडिंग के एंगल की भी जांच शुरू की है।
13 ठिकानों पर ED की कार्रवाई
ED ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पांच राज्यों के 13 स्थानों पर छापे मारे। इनमें उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और मुर्शिदाबाद के अलावा महाराष्ट्र के रायगढ़ के ठिकाने शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल के कलिकापुर स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से 40 लाख रुपये नकद और करीब 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच के लिए कब्जे में लिए गए हैं।
ट्रस्ट और संस्थाओं के लेनदेन की जांच
ED अधिकारियों के अनुसार, जांच ऐसे नेटवर्क पर केंद्रित है जो कथित तौर पर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत कुछ ट्रस्टों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से गतिविधियां चला रहा था।
जांच एजेंसी अब इन संस्थाओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संदिग्ध रेंट अकाउंट की भी पड़ताल कर रही है। आशंका है कि बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों के जरिए ट्रांसफर किया गया।
यूपी ATS की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
ED ने वर्ष 2024 में यूपी आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की FIR के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। FIR में एक संगठित गिरोह पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कराने, उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने में मदद करने के आरोप लगाए गए हैं।
ATS की जांच में कुछ संस्थाओं और बिचौलियों के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई थी। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अवैध तरीके से बसाए जा रहे लोगों तक पैसा किस माध्यम से पहुंचाया गया।
छोटी-छोटी किस्तों में भेजी गई रकम
जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर छह हजार, आठ हजार और 10 हजार रुपये जैसी छोटी रकम की किस्तों में पैसे ट्रांसफर किए। ED अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों, संस्थाओं और धन के स्रोत की जानकारी जुटाने में लगी है।
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