बिजली बिल 2025: एनसीसीओईईई ने देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई) की शुक्रवार को हुई ऑनलाइन बैठक में निर्णय लिया गया कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 संसद में पेश होते ही बिजली कर्मी और अभियंता देशव्यापी आंदोलन करेंगे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे एनसीसीओईईई के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार यह बिल 10 मार्च को संसद में पेश कर सकती है। उन्होंने सभी अभियंताओं और बिजली कर्मियों से आग्रह किया कि वे तैयार रहें। बिल के विरोध में कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
दुबे ने यह भी कहा कि जिस संगठन ने पहले ही बिल का समर्थन कर दिया है, उसे वर्किंग ग्रुप में शामिल करना पूरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और असंवैधानिक बनाता है। बैठक में पी. रत्नाकर राव, आरके त्रिवेदी, मोहन शर्मा, कृष्णा सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे।
बिजली दरों में कमी की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से बिजली दरों में कमी की सिफारिश की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि विद्युत कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस है, इसलिए बिजली दरें कम की जानी चाहिए।
वर्तमान में प्रदेश की सभी डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए नई बिजली दरों का प्रस्ताव रखा है, जिस पर सुनवाई प्रक्रिया जारी है। इस सिलसिले में 9 मार्च को नोएडा में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
वर्मा ने कहा कि सरकार को विद्युत अधिनियम 2003 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग कर राज्य विद्युत नियामक आयोग को निर्देश देना चाहिए कि बिजली दरें घटाई जाएं। इसके लागू होने से प्रदेश के लगभग 3.72 करोड़ उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
उपभोक्ताओं की समस्याएँ
वर्मा ने आरोप लगाया कि विद्युत कंपनियां 2026–27 के लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये का घाटा दिखाकर दरें बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि उपभोक्ताओं का इतना बड़ा सरप्लस अभी भी कंपनियों पर बकाया है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता पूरा बिजली बिल जमा करते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें 24 घंटे की जगह लगभग 18 घंटे बिजली मिल पाती है। कानून के तहत सभी उपभोक्ताओं को पूरा समय बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।
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