पूर्व पालिका उपाध्यक्ष सूबेदार रणधीर सिंह का निधन, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

HIGHLIGHTS
- 90 वर्ष की उम्र में सूबेदार रणधीर सिंह का निधन
- 1965 और 1971 के युद्ध में लिया था हिस्सा
- 14 भाषाओं के थे जानकार, सात भाषाओं में करते थे लेखन
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष सूबेदार रणधीर सिंह का रविवार तड़के करीब चार बजे लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे। नई मंडी स्थित स्वर्गधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रबुद्ध नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सूबेदार रणधीर सिंह 14 भाषाओं के जानकार थे और सात भाषाओं में लेखन करते थे। 90 वर्ष की उम्र में भी वह गुरुमुखी सीख रहे थे। उन्होंने वर्ष 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध में भाग लिया था।
चरथावल ब्लॉक के गांव बधाई खुर्द के मजरा होशियारपुर में जन्मे सूबेदार रणधीर सिंह ने साहित्य, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जिले में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज की कई शिक्षण संस्थाओं में प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाली।
वह करीब दो सप्ताह से अस्वस्थ चल रहे थे। दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में उपचार कराने के बाद वह घर लौट आए थे, लेकिन दो दिन पहले फिर उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें तत्काल मेरठ के लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर मिलते ही सरकुलर रोड स्थित दक्षिणी सिविल लाइन आवास पर शोक जताने वालों का पहुंचना शुरू हो गया। वर्ष 1995 में वह अपने वार्ड से पालिका सदस्य चुने गए थे। इससे पहले वह नुमाइश कैंप से भी सभासद रह चुके थे। उनकी अंतिम यात्रा सरकुलर रोड स्थित आवास से शुरू होकर नई मंडी स्वर्गधाम पहुंची। यहां वेद मंत्रोच्चार के बीच उनके पुत्र नरेंद्र कुमार ने मुखाग्नि दी।
जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, जाट महासभा जिलाध्यक्ष धर्मवीर बालियान, श्री शुकदेव आश्रम शुकतीर्थ के ट्रस्टी कुंवर देवराज पंवार, ओमदत्त देव, स्वामी कल्याणदेव डिग्री कॉलेज बघरा के प्रबंधक सरदार आलम, पूर्व प्राचार्य डॉ. नरेश मलिक, डॉ. सुरेंद्र वीर सिंह और शिक्षक रविंद्र कुमार सहित अन्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
उनके परिवार में चार पुत्र रविंद्र कुमार, पूर्व मेजर देव पाल सिंह, नरेंद्र कुमार और डॉ. सुरेंद्र कुमार हैं। उनकी पत्नी महेंद्री देवी और पुत्री संगीता नेहरा का पहले ही निधन हो चुका है।
मेरठ कॉलेज से की थी पढ़ाई
सूबेदार रणधीर सिंह ने मेरठ कॉलेज, मेरठ से एमए की पढ़ाई पूरी की थी। वर्ष 1960 में उन्हें सेना की एजुकेशन कोर में नियुक्ति मिली। इसके बाद मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में उनकी ट्रेनिंग हुई। उनके पुत्र नरेंद्र कुमार के अनुसार, देशभक्ति उनके लिखे गीतों का आधार थी। उर्दू उनकी पसंदीदा भाषा थी। उन्होंने सेना के ड्रामा मंचों पर अभिनय भी किया। वर्ष 1983 में अंबाला से सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सामाजिक चेतना के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।
गुरुदेव से प्रेरित थे सूबेदार रणधीर : ओमानंद
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि सूबेदार रणधीर सिंह शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की कई ग्रामीण शिक्षण संस्थाओं से जुड़े रहे और सहयोग करते रहे। सामाजिक एवं देशभक्ति के मंचों पर उनकी प्रेरणादायक मौजूदगी हमेशा स्मृतियों में बनी रहेगी।
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