क्वाड में ‘चुनने की आजादी’ जरूरी, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा पर जयशंकर का जोर

HIGHLIGHTS
- अटलांटा में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने अहम मुद्दों पर चर्चा की।
- क्वाड देशों ने भरोसेमंद एआई तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता देने की इच्छा जताई।
- भारत और आसियान देशों में ई-कचरे से खनिज निकालने के लिए अमेरिका 10 मिलियन डॉलर देगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को क्वाड की प्रमुख प्राथमिकताओं में ‘चुनने की स्वतंत्रता’, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और गैर-बाजार प्रथाओं के खिलाफ कदम उठाने को शामिल किया। उन्होंने समूह के एजेंडे को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अधिक व्यावहारिक और समकालीन बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ हुई चर्चा के अहम विषयों की जानकारी दी।
जयशंकर ने क्वाड की प्राथमिकताओं पर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना, समृद्धि को बढ़ावा देना और पसंद की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना क्वाड की लगातार बनी रहने वाली प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
गैर-बाजार प्रथाओं और आर्थिक दबाव का मुद्दा उठा
विदेश मंत्रियों की बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में गैर-बाजार प्रथाओं का मुकाबला करने और बढ़ते आर्थिक दबावों का विषय भी शामिल रहा। हालांकि, जयशंकर ने अपनी पोस्ट में किसी देश का नाम नहीं लिया और न ही उन खास प्रथाओं का विवरण दिया, जिन पर चर्चा हुई।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर उन्होंने आतंकवाद-रोधी प्रयासों, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण से संबंधित मौजूदा समझौतों को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके मुताबिक, इन प्रयासों से क्षेत्र की मजबूती बढ़ाने और शांति एवं स्थिरता को समर्थन देने में मदद मिलेगी।
एआई के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता
बैठक में मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने की इच्छा जताई। इसमें ‘क्वाड एआई एक्सेलेरेटर’ के जरिए मिलने वाली सहायता भी शामिल है।
जारी विज्ञप्ति में सुपर इंटेलिजेंस का भी उल्लेख किया गया है। इसके साथ दिए गए फुटनोट में स्पष्ट किया गया कि यह शब्द भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित है।
कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने के लिए 10 मिलियन डॉलर
मंत्रियों ने भारत और आसियान देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने वाली सुविधाओं के लिए अमेरिका की ओर से 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता का स्वागत किया। यह धनराशि सिर्फ भारत के लिए निर्धारित नहीं है।
चारों क्वाड देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से खनिज निकालने पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता घटाना है। इसके अलावा, वे पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों को एक देश से दूसरे देश तक भेजने की प्रक्रिया आसान बनाने के उपायों पर भी विचार करेंगे।
समुद्री सहयोग के तहत चारों देशों के प्रतिनिधियों ने 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच चेन्नई से पर्थ तक भारतीय तटरक्षक बल के एक गश्ती जहाज पर यात्रा की।
क्या है क्वाड?
क्वाड चार देशों- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का समूह है। इसके तहत समुद्री और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों के साथ मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाता है।
जी20 में ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण का मुद्दा उठाया
इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने जी20 के सामने ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण का मुद्दा उठाया और इसे बेहद नुकसानदायक बताया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कमी का सबसे गंभीर असर ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों पर पड़ रहा है। जयशंकर ने जी20 समूह से इस समस्या को समझने और इसे स्वीकार करने की अपील की।
शनिवार को अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारतीय पत्रकारों के एक समूह से बातचीत में जयशंकर ने बैठक को काफी सार्थक, खुली और जीवंत बताया।
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