UNSC में अस्थायी सीट के लिए भारत का बड़ा एजेंडा, समुद्री सुरक्षा और AI पर रहेगा फोकस

HIGHLIGHTS
- अगले साल जून में UNSC की अस्थायी सीट के लिए मतदान होगा।
- एशिया-प्रशांत समूह की एक सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने होंगे।
- भारत ने साइबर खतरों और वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को गंभीर चुनौती बताया।
वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की भारत की कोशिशों में समुद्री सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रमुख प्राथमिकताओं के तौर पर शामिल किया गया है।
सुरक्षा परिषद में आयोजित उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि साझा समुद्री क्षेत्रों को विवाद का केंद्र बनाने के बजाय उन्हें अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
भारत अगले साल सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ेगा। इस सीट का कार्यकाल 2028 से शुरू होगा। इसके लिए अगले साल जून में मतदान होना है, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह की एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा।
AI और समुद्री सुरक्षा को भारत ने बताया अहम प्राथमिकता
भारतीय स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने चर्चा में कहा कि भारत ने 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं बनाया है।
उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य स्पष्ट है- तकनीक को मानव सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए, न कि उसे कमजोर करना। इसे अवसरों का विस्तार करना चाहिए, न कि असमानता को और इसे हमारे साझा समुद्री क्षेत्रों को अधिक सुरक्षित बनाना चाहिए, न कि विवादों से भरा।"
साइबर खतरों और वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाते हुए पर्वथानेनी ने कहा कि विकासशील देशों को अपने समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और तकनीकी शासन व्यवस्था को आकार देने में प्रभावी भागीदारी के लिए तकनीक, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमताओं तक पहुंच मिलनी जरूरी है।
वाणिज्यिक जहाजों पर हाल में हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं नाविकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। साथ ही, इनसे आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है और विकासशील देशों को बढ़ती लागत तथा आर्थिक अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
यह चर्चा ऐसे समय हुई, जब ईरान की नौसेना ने जानकारी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों से टकरा गए और उनमें आग लग गई। इस घटना ने समुद्री सुरक्षा से जुड़े खतरों को फिर सामने ला दिया।
समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने में AI की भूमिका
हरीश पर्वथानेनी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से सैटेलाइट तस्वीरों, रडार और जहाजों की ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे समुद्री क्षेत्रों की बेहतर निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने भारत के 'इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन' (IFC-IOR) का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केंद्र समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में आपसी सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान की अहमियत को दर्शाता है।
पर्वथानेनी ने कहा कि भारत का यह दृष्टिकोण सागर (SAGAR) के विजन यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास तथा समावेशी समुद्री सहयोग की व्यापक प्रतिबद्धता से प्रेरित है।
स्वायत्त तकनीक के इस्तेमाल में जवाबदेही जरूरी
भारतीय राजदूत ने स्वायत्त प्रणालियों (ऑटोनॉमस सिस्टम्स) के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इनके बढ़ते उपयोग से यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि किसी घटना के लिए जिम्मेदार कौन है और जवाबदेही किसकी तय होगी। इसके अलावा, अनजाने में स्थिति और गंभीर होने का खतरा भी रहता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उभरती तकनीकों को अपनाते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए। साथ ही, इंसानों की सार्थक निगरानी और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
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