हमीरपुर: फॉरेंसिक जांच के इंतजार में चार घंटे तक फंदे पर लटका रहा महिला का शव
By Hitesh — August 2, 2026

HIGHLIGHTS
- पुलिस सूचना मिलने के करीब 15 मिनट बाद मौके पर पहुंची थी।
- फॉरेंसिक टीम दूसरी घटना की जांच में व्यस्त होने से देरी हुई।
- डॉक्टर के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचाने से बच सकती थी जान।
Author: — Dainik Dehat
हमीरपुर। हेलापुर गांव में शनिवार को एक महिला कमरे में फंदे से लटक गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस करीब 15 मिनट में मौके पर पहुंच गई, लेकिन फॉरेंसिक टीम के इंतजार के कारण महिला को चार घंटे बाद फंदे से उतारा जा सका। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने मामले को आत्महत्या बताया है। वहीं, महिला के पिता का आरोप है कि पुलिस ने खुद ही मान लिया कि महिला की मौत हो चुकी है। उनका कहना है कि अगर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी किसी को कमरे के अंदर नहीं जाने दे रहे थे।
फॉरेंसिक जांच को लेकर पुलिस ने दी सफाई
पुलिस का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के अनुसार सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में घटना स्थल पर फॉरेंसिक जांच जरूरी होती है।
वहीं, फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि आत्महत्या के मामलों में यदि हत्या का आरोप नहीं है तो शव को फंदे से उतारा जा सकता है।
घर में मौजूद थी महिला और बेटी
मामला हमीरपुर सदर क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, नरेश कुशवाहा की पहली पत्नी की वर्ष 2013 में मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 में बांदा निवासी कल्लू की बेटी गुड़िया से दूसरी शादी की थी।
घटना के समय नरेश काम पर गए हुए थे, जबकि छोटी बेटी और बेटा स्कूल गए थे। घर में पत्नी गुड़िया और बड़ी बेटी मोहिनी मौजूद थीं। दोपहर करीब पौने 12 बजे बेटी ने फोन कर जानकारी दी कि उसकी मां ने फंदा लगा लिया है। उसने यूपी-112 पर भी सूचना दी।
पुलिस करीब 12 बजे मौके पर पहुंच गई।
फॉरेंसिक टीम के इंतजार में हुई देरी
पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को सूचना दी तो पता चला कि टीम जरिया क्षेत्र में दुष्कर्म के एक मामले की जांच के लिए जा रही है। दोनों घटनास्थलों के बीच करीब 150 किलोमीटर की दूरी बताई गई है।
फॉरेंसिक टीम ने पहले जरिया में जांच पूरी की और इसके बाद हेलापुर पहुंची। शाम करीब चार बजे महिला के शव को फंदे से उतारा गया।
एएसपी ने बताई फील्ड यूनिट की समस्या
एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि जिले में एक ही फील्ड यूनिट की टीम है, जिसके कारण ऐसी स्थिति में परेशानी सामने आ रही है।
वहीं, अधिवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की पुष्टि के बाद ही किसी व्यक्ति को मृत माना जा सकता है।
डॉक्टर ने बताया समय पर इलाज से बच सकती थी जान
जिला पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरएस प्रजापति ने बताया कि फंदे से किसी व्यक्ति की मौत की स्थिति तय हो जाती है। उन्होंने कहा कि यदि फंदा ढीला हो तो मृत्यु होने में पांच से सात मिनट तक का समय लग सकता है और समय पर अस्पताल पहुंचाने से जान बचाई जा सकती है।
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