हत्या में उम्रकैद की सजा, पैरोल तोड़कर 40 साल फरार रहा; सरकारी शिक्षक बनकर जीता बेस्ट टीचर अवॉर्ड

HIGHLIGHTS
- संडेला वीरन्ना को 1983 में उम्रकैद की सजा मिली थी।
- सजा के छह महीने बाद पैरोल पर बाहर आया था।
- मई 2024 में स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे पकड़ा।
हैदराबाद। हैदराबाद से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब 40 साल पहले एक व्यक्ति को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा शुरू होने के कुछ समय बाद उसे पैरोल मिली, लेकिन वह पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद जेल वापस नहीं लौटा।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पैरोल तोड़कर फरार रहने के दौरान वह सरकारी शिक्षक बन गया और उसे ‘बेस्ट टीचर’ का अवॉर्ड भी मिला।
पैरोल तोड़कर फरार हुआ, फिर बना सरकारी शिक्षक
करीब 70 वर्षीय संडेला वीरन्ना को 1970 के दशक के आखिर में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। वर्ष 1983 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा शुरू होने के करीब छह महीने बाद वीरन्ना को पैरोल पर रिहा किया गया, लेकिन इसके बाद वह दोबारा जेल नहीं लौटा।
मई 2024 में तेलंगाना जेल विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस की मदद से वीरन्ना को खोज निकाला। इसके बाद उसे चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
हाई कोर्ट ने दोबारा पैरोल की याचिका की खारिज
संडेला वीरन्ना की पत्नी संडेला चरम्मा ने मेडिकल और मानवीय आधार पर याचिका दायर की थी। उन्होंने लंबे समय से जेल में बंद रहने और पिछले तीन साल से पैरोल नहीं मिलने को तेलंगाना हाई कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
वीरन्ना के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस टी. माधवी देवी ने कहा कि अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और बाद में दोषी ठहराए जाने की जानकारी छिपाकर सरकारी नौकरी हासिल करना बहुत कुछ बताता है।
जस्टिस टी. माधवी देवी ने यह भी कहा कि सरकारी नौकरी हासिल करने और बिना किसी रुकावट के सेवा करने से पता चलता है कि उसने धोखे से नौकरी हासिल की थी।
जेल से बाहर रहने के दौरान वीरन्ना ने करीब चार दशक महबूबाबाद जिले के डंथलापल्ली में आरामदायक जिंदगी बिताई। इसी दौरान उसे सरकारी शिक्षक की नौकरी भी मिल गई। वर्ष 2004 में उसे ‘बेस्ट टीचर अवॉर्ड’ दिया गया और 2013 में वह अपने पद से रिटायर भी हो गया।
मेडिकल आधार पर रिहाई की मांग
अपनी याचिका में खुद रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी चराम्मा ने कोर्ट से कहा कि इतनी लंबी देरी के बाद वीरन्ना की बची हुई जेल की सजा जारी रखना मनमाना था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पैरोल के कथित उल्लंघन को लेकर उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
संडेला वीरन्ना की पत्नी ने बताया कि उनका बेटा यूके का स्थायी निवासी है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि वीरन्ना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनके लिए तत्काल और विशेष मेडिकल उपचार की जरूरत है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है।
याचिका का विरोध करते हुए गृह विभाग के सरकारी वकील महेश राजे ने कहा कि वीरन्ना ने पैरोल के बाद जानबूझकर सरेंडर नहीं किया था। उसे खोजने और पकड़ने के लिए कई बार तलाश करनी पड़ी।
राजे ने कहा कि चेरलापल्ली जेल में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं और कैदियों को विशेष इलाज भी दिया जा रहा है।
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