हिमाचल में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक, सरकार ने जारी की अधिसूचना

HIGHLIGHTS
- खाद्य सुरक्षा विभाग की सिफारिश के बाद सरकार ने लिया फैसला
- एनालॉग उत्पाद असली पनीर जैसे दिखने के कारण इस्तेमाल हो रहे थे
- होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट को मेन्यू में पनीर की जानकारी देनी होगी
मंडी। हिमाचल प्रदेश में असली पनीर के नाम पर बिक रहे एनालॉग से बने नकली डेयरी उत्पादों पर प्रदेश सरकार ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
लगातार फेल हो रहे सैंपलों और आम लोगों के साथ हो रहे छलावे को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की सिफारिशों के आधार पर जारी नए आदेशों के तहत अब एनालॉग से तैयार सभी डेयरी उत्पादों की बिक्री, भंडारण और परिवहन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद हिमाचल प्रदेश ऐसा कड़ा फैसला लेने वाला देश का अगला राज्य बन गया है। खाद्यापूर्ति विभाग के कार्यकारी निदेशक जितेंद्र साजटा ने पुष्टि की है कि सरकार ने एनालॉग डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है।
एनालॉग उत्पाद देखने में असली पनीर जैसे ही होते हैं और इनकी कीमत भी काफी कम होती है। इसी वजह से लोग और कारोबारी इन्हें असली पनीर समझकर इस्तेमाल कर रहे थे।
वनस्पति तेलों और रसायनों से तैयार किए जाने के कारण इन्हें स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक बताया गया है। नए नियमों के अनुसार होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को अपने मेन्यू में स्पष्ट रूप से बताना होगा कि ग्राहकों को किस तरह का पनीर परोसा जा रहा है।
बिल, सोर्स और बैच का ब्योरा रखना होगा
सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पैकेटबंद पनीर की लेबलिंग और उसकी शुद्धता की पहचान के लिए कारोबारियों को खरीद से जुड़े बिल, सोर्स यानी उत्पादन स्थल का विवरण और बैच से संबंधित पूरी जानकारी रखनी होगी।
अब तक गाड़ियों के जरिए खुले तौर पर एनालॉग पनीर ढाबों और होटलों तक पहुंचाया जाता था, जिसकी आपूर्ति से जुड़ा कोई विवरण नहीं होता था। नए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.