इमरान मसूद को बड़ा सियासी झटका, दामाद शायान मसूद ने छोड़ी कांग्रेस; सपा में हुए शामिल

HIGHLIGHTS
- शायान मसूद ने लखनऊ पहुंचकर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली।
- अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी का पटका पहनाकर स्वागत किया।
- शायान मसूद के पिता शाजान मसूद, इमरान मसूद के भाई हैं।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को बड़ा सियासी झटका लगा है। उनके दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद शायान मसूद ने अपने सोशल मीडिया पेज पर अखिलेश यादव के समर्थन में गाना लगाया।
बता दें कि शायान मसूद के पिता शाजान मसूद, इमरान मसूद के भाई हैं। शायान मसूद अखिलेश यादव सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में बसपा में चले गए थे। शायान मसूद पूर्व केंद्रीय मंत्री रसीद मसूद के पोते हैं।
दिशा की बैठक में सपा विधायक से नोकझोंक
सहारनपुर में दिशा की बैठक के दौरान 18 अगस्त को इमरान मसूद और सहारनपुर देहात से सपा विधायक आशु मलिक के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी। उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि चुनाव में अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच गठबंधन होगा। इमरान मसूद लगातार गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की बात कर रहे हैं।
इमरान मसूद के बयान से परिवार में थी नाराजगी
इमरान मसूद ने हाल ही में बयान दिया था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा। उनके इस बयान को लेकर परिवार में नाराजगी थी। तभी से चर्चाएं थीं कि शायान मसूद कांग्रेस छोड़कर किसी अन्य दल में जा सकते हैं।
अखिलेश यादव ने दिलाई पार्टी की सदस्यता
चर्चाओं का दौर तब खत्म हुआ, जब शायान मसूद अपने पिता शाजान मसूद के साथ सीधे लखनऊ पहुंचे। लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शायान मसूद को पार्टी का पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्हें आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
इमरान मसूद विवाद का चुनावी असर?
इमरान मसूद 2022 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे, लेकिन अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बाद इमरान मसूद बसपा में चले गए थे और फिर कांग्रेस में वापस आकर सांसद बने। सहारनपुर में विधानसभा की 7 सीटें हैं, जिनमें से 5 बीजेपी और 2 सपा के पास हैं। अब परिवार के इस विवाद का असर चुनाव पर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इस विवाद का फायदा बीजेपी को हो सकता है।
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