कंगना रणौत को कोर्ट से राहत, बयान दर्ज कराने की याचिका खारिज; 5 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

HIGHLIGHTS
- वादी पक्ष ने अधूरी जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत में प्रार्थनापत्र दिया था।
- अदालत ने बीएनएसएस प्रावधानों के तहत विपक्षी का बयान दर्ज कराने की मांग को स्वीकार नहीं किया।
- कंगना रणौत के खिलाफ मामला सितंबर 2024 में वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने दायर किया था।
आगरा। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रणौत के खिलाफ दर्ज मामले में मंगलवार को एमपी-एमएलए अनुज कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने कंगना रणौत को तलब कर उनका बयान दर्ज कराने से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी।
वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने 6 जून को अदालत में प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। इसमें कहा गया था कि थाना न्यू आगरा पुलिस ने वादी और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, लेकिन कंगना रणौत का बयान नहीं लिया गया।
प्रार्थनापत्र में यह भी कहा गया था कि उनकी अधिवक्ता अनसूया चौधरी का बयान दर्ज कर जांच रिपोर्ट पेश की गई, जो अधूरी है। ऐसे में अदालत से कंगना रणौत को तलब कर उनका बयान दर्ज कराने की मांग की गई थी।
अदालत ने याचिका को किया खारिज
वादी पक्ष की ओर से तर्क दिया गया था कि अधिवक्ता को पक्षकार की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं होता। इस पर अदालत ने माना कि धारा 225 बीएनएसएस के प्रावधानों या अध्याय-16 बीएनएसएस की धारा 223 से 226 के तहत विपक्षी को अदालत में बुलाकर बयान दर्ज करने का प्रावधान नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि विपक्षी पक्ष की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए उनके अधिवक्ता पहले ही उपस्थित हो चुके हैं।
कंगना रणौत के खिलाफ 2024 में दायर हुआ था वाद
राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने 11 सितंबर 2024 को सांसद कंगना रणौत के खिलाफ अदालत में वाद दायर किया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कंगना रणौत ने 26 अगस्त 2024 को दिए अपने बयान में किसानों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इसके अलावा उन पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के संबंध में अभद्र टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया गया था।
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