मुरादाबाद: सपा के ब्राह्मण सम्मेलन में चारों विधायक नदारद, अंदरूनी कलह पर उठे सवाल

HIGHLIGHTS
- मुरादाबाद में सपा के ब्राह्मण सम्मेलन में पार्टी के चारों विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर सवाल उठे।
- सम्मेलन में सांसद सनातन पांडेय और सांसद रुचि वीरा ही प्रमुख जनप्रतिनिधि के रूप में मौजूद रहे, जबकि विधायकों की गैरहाजिरी चर्चा का विषय बनी।
- विधायकों की अनुपस्थिति के बाद सपा की अंदरूनी खींचतान को लेकर फिर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुरादाबाद: ब्राह्मण समाज को अपने साथ जोड़ने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी शनिवार को अपने ही संगठन के भीतर की सियासी दूरी को छिपा नहीं सकी। बुद्धि विहार स्थित व्हाइट हाउस में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में पार्टी के चारों विधायक शामिल नहीं हुए।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि बलिया के सांसद सनातन पांडेय के साथ मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा ही एकमात्र जनप्रतिनिधि के रूप में मौजूद रहीं। बाकी कार्यक्रम संगठन के पदाधिकारियों के सहारे ही चलता रहा। मंडल की छह विधानसभा सीटों पर भाजपा के खिलाफ रणनीति बनाने की तैयारी कर रही सपा अपने विधायकों को एक मंच पर नहीं ला सकी, जिससे पार्टी के अंदर समन्वय को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
कार्यक्रम में कांठ विधायक कमाल अख्तर, मुरादाबाद देहात विधायक नासिर कुरैशी, बिलारी विधायक फहीम इरफान और ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान में से कोई भी नहीं पहुंचा। अब चर्चा है कि चारों विधायकों की अनुपस्थिति केवल संयोग थी या फिर पार्टी के अंदर चल रही खींचतान का संकेत।
सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जानकारी भेजी गई थी।
विधायकों के जवाब और जिलाध्यक्ष के दावे में अंतर
जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव के अनुसार, कांठ विधायक कमाल अख्तर अमरोहा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम में व्यस्त थे, इसलिए वह सम्मेलन में नहीं पहुंच सके। वहीं मुरादाबाद देहात विधायक नासिर कुरैशी के लखनऊ में होने की बात कही गई।
हालांकि नासिर कुरैशी का बयान जिलाध्यक्ष के दावे से पूरी तरह अलग नजर आया। उन्होंने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ में हैं और उन्हें सम्मेलन की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि संभव है सूचना उनके कार्यालय भेजी गई हो, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत तौर पर इसकी जानकारी नहीं मिली।
ठाकुरद्वारा विधायक नवाब जान ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी थी, लेकिन तारीख की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपनी टीम को कार्यक्रम में भेजने की बात कही, जबकि वह किसी काम से ढकिया गए हुए थे।
वहीं बिलारी विधायक फहीम इरफान के नहीं पहुंचने पर जिलाध्यक्ष भी कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सके। उन्होंने कहा कि सूचना भेजी गई थी, लेकिन उनके अनुपस्थित रहने की वजह की जानकारी नहीं है।
पहले भी सामने आ चुकी है पार्टी की अंदरूनी खींचतान
यह पहला अवसर नहीं है जब सपा के किसी कार्यक्रम में अंदरूनी मतभेद की चर्चा हुई हो। इससे पहले सांसद रुचि वीरा की अध्यक्षता में हुई दिशा समिति की बैठक में भी पार्टी के विधायक शामिल नहीं हुए थे।
करीब दो महीने पहले रामगंगा विहार के क्लिफटन बैंक्वेट हॉल में आयोजित पीडीए सम्मेलन में पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी नाराज होकर बिना भोजन किए लौट गए थे। उस समय कार्यकर्ताओं ने शहर विधानसभा से सलीम अख्तर को टिकट देने की मांग उठाई थी, जिससे नेतृत्व असहज स्थिति में आ गया था।
इसके बाद ताजपुर में हुए पीडीए सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा को आमंत्रित नहीं करने और पोस्टरों से उनका फोटो गायब रहने को लेकर विवाद हुआ था। मामला इतना बढ़ा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कांठ विधायक कमाल अख्तर के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) पद से इस्तीफे के बाद भी पार्टी के अंदर असंतोष की चर्चाएं तेज हुई थीं।
ब्राह्मण सम्मेलन के बाद फिर तेज हुई चर्चा
अब ब्राह्मण सम्मेलन में चारों विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। ऐसे समय में जब समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरण साधने और नए वोट बैंक को जोड़ने की कोशिश कर रही है, अपने ही जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच दूरी बनी रही तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल ब्राह्मण सम्मेलन से ज्यादा चर्चा उसमें नजर आई सपा की अंदरूनी स्थिति को लेकर हो रही है।
सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की सूचना भेजी गई थी। अमरोहा में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष का कार्यक्रम होने के कारण कमाल अख्तर शामिल नहीं हो सके। देहात विधायक लखनऊ में हैं। बिलारी और ठाकुरद्वारा विधायक के नहीं आने का कारण जानकारी में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह ब्राह्मण समाज पर केंद्रित कार्यक्रम था, इसलिए किसी पर ज्यादा दबाव नहीं बनाया गया।
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