यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिल सकती है बड़ी सौगात, मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार

HIGHLIGHTS
- प्रस्ताव को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने तैयार किया है
- वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग से प्रस्ताव को सहमति मिल चुकी है
- करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लाभ मिलेगा
लखनऊ। चुनावी साल में आधी आबादी को साधने के लिए प्रदेश सरकार एक और बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के इस प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।
इस फैसले से प्रदेश की करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1.67 लाख सहायिकाओं को फायदा होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल में ही उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसी के तहत विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग की सहमति मिल चुकी है।
मानदेय में बढ़ोतरी से प्रदेश सरकार के खजाने पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। खास बात यह है कि प्रस्तावित वृद्धि का पूरा अतिरिक्त भार राज्य सरकार खुद उठाएगी और इसके लिए केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।
इतना हो जाएगा मानदेय
फिलहाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 4500 रुपये और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 3500 रुपये है। प्रस्ताव के मुताबिक राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी 3500 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये करेगी, जिससे कुल मानदेय 12 हजार रुपये हो जाएगा।
इसी तरह सहायिकाओं के मानदेय में राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी में 2 हजार रुपये की बढ़ोतरी करेगी। इसके बाद उन्हें कुल 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
महिला मतदाताओं पर बढ़ा फोकस
सरकार के इस संभावित फैसले को आर्थिक राहत के साथ-साथ चुनावी साल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नेटवर्क गांवों से लेकर शहरी मोहल्लों तक फैला हुआ है।
लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इस बड़े महिला वर्ग को राहत देने के साथ सरकार को महिला सशक्तीकरण और कल्याणकारी कार्यों को प्रमुखता से सामने रखने का अवसर भी मिलेगा।
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