मुजफ्फरनगर: कांवड़ यात्रा में दिखी अनोखी भक्ति, मां-चाची को कांवड़ में बैठाकर लाए यशवीर

HIGHLIGHTS
- दुल्हेरा गांव के यशवीर ने मां और चाची की इच्छा पूरी करने के लिए उठाया अनोखा कदम।
- कांवड़ के दोनों पलड़ों में बैठीं बुजुर्ग महिलाएं, जबकि गंगाजल की कैन को संतुलित किया गया।
- परिवार के पांच अन्य सदस्यों ने भी पूरी यात्रा के दौरान यशवीर का साथ दिया।
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा में जहां कई आकर्षक और अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं, वहीं शनिवार सुबह छपार में पहुंची एक 'श्रवण कांवड़' ने लोगों को भावुक कर दिया। शाहपुर थाना क्षेत्र के दुल्हेरा गांव निवासी शिवभक्त यशवीर अपनी मां और चाची को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौटे।
यशवीर की सेवा भावना और बुजुर्गों के प्रति समर्पण को देखकर रास्ते भर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। उनकी कांवड़ सबसे अलग नजर आई, क्योंकि उसके एक पलड़े में उनकी मां और दूसरे पलड़े में उनकी चाची बैठी थीं। वहीं दोनों सिरों पर गंगाजल की कैन को संतुलित तरीके से बांधा गया था।
60 वर्ष से अधिक उम्र की दोनों महिलाओं के लिए पैदल यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में यशवीर ने उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी करने का संकल्प लिया।
यशवीर ने बताया कि उनकी कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं थी। उनकी मां और चाची काफी समय से हरिद्वार जाकर गंगा स्नान करने और कांवड़ यात्रा में शामिल होने की इच्छा रखती थीं। उम्र अधिक होने के कारण उन्होंने दोनों को कांवड़ में बैठाकर यात्रा पूरी कराने का फैसला किया।
आठ साल पहले भी की थी ऐसी सेवा
यशवीर ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने इस तरह की सेवा की है। करीब आठ वर्ष पहले भी उन्होंने अपनी मां और चाची को इसी तरह कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार की यात्रा कराई थी।
इस बार भी परिवार के पांच अन्य सदस्यों ने पूरी यात्रा के दौरान उनका सहयोग किया। इस तरह यह यात्रा सेवा, समर्पण और पारिवारिक एकजुटता की मिसाल बन गई।
लोगों ने बताया आधुनिक दौर का श्रवण कुमार
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद 'श्रवण कांवड़' को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने यशवीर के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उनकी सेवा भावना की सराहना की।
कई लोगों ने उन्हें आधुनिक दौर का श्रवण कुमार बताते हुए कहा कि उन्होंने बुजुर्गों के सम्मान और सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
युवाओं से बुजुर्गों की सेवा की अपील
यशवीर ने कहा कि माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना हर संतान का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि मौका मिले तो अपने बुजुर्गों की इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास जरूर करें, क्योंकि उनकी सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.