पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में पहली बार 19 महिला जज, नौ नए अतिरिक्त न्यायाधीशों ने ली शपथ

HIGHLIGHTS
- नौ नए अतिरिक्त न्यायाधीशों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
- नई नियुक्तियों में तीन महिला न्यायाधीश शामिल हैं।
- इससे पहले हाई कोर्ट में महिला जजों की अधिकतम संख्या 18 थी।
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व के मामले में शुक्रवार को एक नया मुकाम हासिल किया। नौ अतिरिक्त न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के बाद हाई कोर्ट में महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 19 हो गई।
एक सदी से अधिक पुराने हाई कोर्ट के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिला न्यायाधीश एक साथ पीठ का हिस्सा बनी हैं। इससे पहले महिला न्यायाधीशों की संख्या अधिकतम 18 रही थी, जबकि इससे पहले यह आंकड़ा 13 तक पहुंचा था।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को हाई कोर्ट परिसर में आयोजित समारोह में नौ नए अतिरिक्त न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें तीन महिला न्यायाधीश मोनिका छिब्बर शर्मा, पूजा चोपड़ा और दिव्या शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा हरियाणा के महाधिवक्ता प्रविंद्र सिंह चौहान, हरमीत सिंह देओल, राजेश गौड़, सुनीश बिंदलिश, मिंदरजीत यादव और रविंदर मलिक ने भी अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों की अधिसूचना गुरुवार को जारी की थी। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने तीन महीने से अधिक समय पहले इन सभी नामों की अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। शपथ ग्रहण समारोह में हाई कोर्ट के कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अलावा अधिकारी, नवनियुक्त न्यायाधीशों के परिजन और न्यायिक समुदाय के सदस्य मौजूद रहे।
तीन नई महिला नियुक्तियों से संख्या 19 हुई
हाई कोर्ट में वर्तमान महिला न्यायाधीशों में अलका सरीन, अर्चना पुरी, लपिता बनर्जी, निधि गुप्ता, अमरजोत भट्टी, मनीषा बत्रा, हरप्रीत कौर जीवन, सुखविंदर कौर, सुधीप्ति शर्मा, कीर्ति सिंह, मंदीप पन्नू, रुपिंदरजीत चहल, शालिनी सिंह नागपाल, आराधना सावनी, रमेश कुमारी और नीरजा के. कलसन शामिल हैं। तीन नई नियुक्तियों के बाद महिला न्यायाधीशों की संख्या 19 हो गई है।
महिला न्यायाधीशों की यह संख्या न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इससे महिलाओं, बच्चों और लैंगिक न्याय से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशील और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही न्यायिक व्यवस्था में अलग-अलग दृष्टिकोणों के बेहतर संतुलन और समाज के व्यापक प्रतिनिधित्व की संभावना भी बढ़ेगी।
अश्वनी कुमार मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश बनाने की मंजूरी
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा के नाम को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के नियमित मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए मंजूरी दे दी है। केंद्र की ओर से इसकी अधिसूचना जल्द जारी होने की संभावना है।
प्रविंद्र सिंह चौहान के न्यायाधीश बनने के बाद हरियाणा में नए महाधिवक्ता की नियुक्ति का रास्ता भी साफ होगा। सरकार को अब हाई कोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में राज्य का पक्ष रखने तथा अपने विधिक दल का नेतृत्व करने के लिए नए शीर्ष विधि अधिकारी का चयन करना होगा।
न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों का बोझ
इन नियुक्तियों के समय हाई कोर्ट लंबित मामलों की बड़ी संख्या और न्यायाधीशों की कमी से जूझ रहा है। 85 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या के मुकाबले अदालत में इससे पहले 55 न्यायाधीश कार्यरत थे और 4.22 लाख से अधिक मामले लंबित थे। इनमें 2,55,274 दीवानी और 1,67,587 आपराधिक मामले शामिल थे।
नई नियुक्तियों के बाद हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 64 हो गई है, जबकि स्वीकृत पद 85 हैं। अभी भी 21 पद रिक्त हैं। नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक क्षमता बढ़ने और लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है, हालांकि स्वीकृत और कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या के बीच अंतर अभी भी बना हुआ है।
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