भारत की अंतरिक्ष उड़ान को नई दिशा, 2040 तक चंद्रमा पर इंसान उतारने की तैयारी: इसरो चीफ

HIGHLIGHTS
- इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
- उन्होंने आईआईटी दिल्ली में आयोजित व्याख्यान में हिस्सा लिया।
- व्याख्यान का विषय ‘इंडियाज स्पेस प्रोग्राम: द चैलेंजेज एंड वे फॉरवर्ड’ था।
नई दिल्ली। भारत अब अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों के साथ आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के तहत देश मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने और चंद्रमा की सतह पर मानव उतारने जैसे मिशनों की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने दी।
इसरो चीफ ने साझा की भविष्य की योजनाएं
डॉ. वी. नारायणन आईआईटी दिल्ली में ‘इंडियाज स्पेस प्रोग्राम: द चैलेंजेज एंड वे फॉरवर्ड’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अब तक की यात्रा और आगे की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
आईआईटी दिल्ली के साथ सौर पैनल तकनीक और बायोमैकेनिक्स सहित नए क्षेत्रों में इसरो और संस्थान के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि अंतरिक्ष उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां भारत ने वैश्विक स्तर की स्वदेशी तकनीक विकसित की है।
गगनयान से पहले मानवरहित मिशन की तैयारी
इसरो प्रमुख ने बताया कि गगनयान के पहले मानवरहित मिशन की तैयारी जारी है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक भेजने की योजना है, जबकि 2035 तक इसके अन्य मॉड्यूल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही चंद्रयान-4 के जरिए चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने, शुक्र मिशन और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर उतारने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
30 हजार किलोग्राम तक भार ले जाने वाले प्रक्षेपण यान पर काम
इसके अलावा 30 हजार किलोग्राम तक भार को लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने वाले अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान विकसित किए जा रहे हैं। आंशिक रूप से दोबारा उपयोग किए जा सकने वाले रॉकेट तैयार करने पर भी काम चल रहा है।
डॉ. वी. नारायणन ने छात्रों से कहा कि उनका लक्ष्य केवल अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना भी होना चाहिए।
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