गोमतीनगर में बनेगा नया विधानभवन, निर्माण के लिए कंपनियों ने पेश किया डिजाइन

HIGHLIGHTS
- लखनऊ के गोमतीनगर में प्रस्तावित नए विधानभवन के निर्माण के लिए कई कंपनियों ने एलडीए के सामने अपने डिजाइन और योजनाएं पेश कीं।
- 245 एकड़ जमीन पर बनने वाला नया परिसर डिजिटल, पेपरलेस और 100 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
- परियोजना में अत्याधुनिक सुरक्षा, अंडरग्राउंड टनल, नया सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास और विधायक हॉस्टल जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
लखनऊ। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की करीब 245 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित नए विधानभवन परिसर को लेकर कवायद तेज हो गई है। परियोजना के निर्माण के लिए कई कंपनियां सामने आई हैं और उन्होंने सोमवार को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सामने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
इससे पहले भी कुछ कंपनियां नए विधानभवन से जुड़ी अपनी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण कर चुकी हैं। सभी एजेंसियों ने नए विधानभवन, आधुनिक सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास, विधायक हॉस्टल और वीवीआईपी प्रशासनिक ब्लॉक के निर्माण को लेकर अपने-अपने डिजाइन और योजनाएं साझा कीं।
उच्च स्तरीय समिति करेगी कंपनी का चयन
नए विधानभवन परियोजना के लिए अंतिम रूप से किस कंपनी को जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका फैसला शासन स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति करेगी। एलडीए की ओर से प्रेजेंटेशन देने वाली करीब एक दर्जन कंपनियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, चयन प्रक्रिया के बाद ही निर्माण एजेंसी तय की जाएगी और इसके बाद परियोजना के अगले चरण की कार्रवाई शुरू होगी।
100 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होगा डिजाइन
प्रस्तावित नया विधानभवन पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था पर आधारित होगा। इसे आने वाले करीब 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन करने की योजना है।
परियोजना में आधुनिक तकनीक, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और सुगम यातायात प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। वीवीआईपी आवाजाही के दौरान गोमतीनगर क्षेत्र में जाम की समस्या से बचने के लिए अंडरग्राउंड टनल और विशेष प्रवेश-निकास मार्गों का भी प्रस्ताव शामिल किया गया है।
आधुनिकता के साथ दिखेगी यूपी की विरासत
प्रस्तावित परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को भी शामिल करने की योजना बनाई गई है। डिजाइन में राज्य की विरासत और आधुनिक वास्तुकला का संतुलन रखने पर जोर दिया गया है।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि कंपनियों के प्रस्तुतिकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
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