पटना में पीएचडी धारकों का आमरण अनशन 11वें दिन भी जारी, दो अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ी

HIGHLIGHTS
- प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर बातचीत के लिए पहल नहीं करने का आरोप लगाया।
- अभ्यर्थियों ने पीएचडी, NET-JRF और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों से समर्थन की अपील की।
- प्रदर्शनकारियों ने नियमित नियुक्ति और डोमिसाइल नीति समेत कई मांगें रखी हैं।
पटना। ऑल पीएचडी होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार का गर्दनीबाग में चल रहा आमरण अनशन शुक्रवार को 11वें दिन भी जारी रहा। अनशन पर बैठे दो अभ्यर्थी विकू सिंह प्रधान और अभिषेक मेहता की तबीयत बिगड़ गई।
विकू सिंह प्रधान की हालत ज्यादा खराब होने के बाद उनके स्वजन उन्हें आरा लेकर चले गए, जहां एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। वहीं, अभिषेक मेहता का इलाज गर्दनीबाग स्थित अस्पताल में चल रहा है। अभ्यर्थी कुमुद पटेल अभी भी अनशन पर डटे हुए हैं।
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई अधिकारी उनका हाल जानने नहीं पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता को लेकर भी प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने सभी पीएचडी धारकों, शोधार्थियों, एनईटी-जेआरएफ अभ्यर्थियों और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे अधिक संख्या में गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचकर आमरण अनशन का समर्थन करें।
अनशनकारियों की प्रमुख मांगें
- यूजीसी रेगुलेशन के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करना।
- नियुक्ति प्रक्रिया में एनईटी, जेआरएफ, पीएचडी और एमफिल अभ्यर्थियों को उचित वेटेज देना।
- अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित करना।
- गेस्ट फैकल्टी की सेवाओं का 65 वर्ष की आयु तक सामंजन करना।
- रिक्त पदों पर शीघ्र एवं नियमित नियुक्ति करना।
- डोमिसाइल नीति लागू करना।
- विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को पूर्ण शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना।
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