PM मोदी के आपत्तिजनक पोस्टर मामले में श्रीलेखा मित्रा को राहत, हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

HIGHLIGHTS
- श्रीलेखा मित्रा के खिलाफ कई पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज हैं।
- कोर्ट ने पोस्टर के स्वरूप पर हैरानी जताई।
- अभिनेत्री को 24 दिसंबर तक कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मिली।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा की ओर से जुलाई में छात्रों की एक विरोध रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपत्तिजनक चित्रण वाले पोस्टर को प्रदर्शित किए जाने के मामले में हैरानी जताई है। हालांकि, मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर उनकी गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई है।
क्या है पूरा मामला?
24 जुलाई को कोलकाता की सड़कों पर कई लोगों ने कथित नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। यह घटनाक्रम केंद्रीय शिक्षा मंत्री के दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में छात्रों के विरोध के बाद इस्तीफा देने से एक दिन पहले हुआ था।
श्रीलेखा मित्रा मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में हुए इस प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। इसी दौरान उन्होंने एक पोस्टर के साथ तस्वीर खिंचवाई थी। भाजपा की ओर से की गई शिकायत के अनुसार, पोस्टर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपत्तिजनक तस्वीर दिखाई गई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
अभिनेत्री के खिलाफ कई जिलों में शिकायतें भी दर्ज की गई थीं। एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दायर श्रीलेखा मित्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि कार्टून का स्वरूप देखकर कोर्ट को गहरा धक्का लगा है।
कोर्ट ने क्या सवाल उठाया?
पोस्टर को 'अशोभनीय प्रस्तुति' बताते हुए न्यायाधीश ने कहा कि देश के किसी भी समझदार नागरिक को इसे पोस्ट नहीं करना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने अभिनेत्री के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य से सवाल किया कि प्रधानमंत्री का ऐसा आपत्तिजनक कार्टून क्यों दिखाया गया। इस पर मित्रा के वकील ने माना कि पोस्टर अशोभनीय था, लेकिन उनका तर्क था कि इससे कानून की किसी आपराधिक धारा का उल्लंघन नहीं होता।
कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
जस्टिस भट्टाचार्य ने निर्देश दिया कि 24 दिसंबर तक कोर्ट की अनुमति के बिना याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि श्रीलेखा मित्रा जांच में सहयोग करती हैं तो उन्हें यह सुरक्षा आगे भी दी जाएगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच के सिलसिले में जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए अभिनेत्री को 48 घंटे का नोटिस दिया जाना चाहिए।
अगली सुनवाई कब है?
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि 14 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल की जाए।
गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान श्रीलेखा मित्रा के वकील ने बताया कि अभिनेत्री ने जुलाई में नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान एक कार्टून वाला पोस्टर दिखाया गया था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल के अलग-अलग पुलिस थानों में उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गईं।
वकील ने दलील दी कि इन शिकायतों में अभिनेत्री के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता। उन्होंने सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ने और उन्हें रद्द करने की मांग की।
इस मांग का विरोध करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने कहा कि कार्टून अभद्र था और यह अपने आप में एक अपराध है। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि श्रीलेखा मित्रा के खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में कुल 16 एफआईआर दर्ज हैं।
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