PoK में बढ़ा तनाव, इंटरनेट बंद कर लगाए गए प्रतिबंध; प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के आरोप

HIGHLIGHTS
- गुलाम कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों के बीच तनाव बढ़ा, पांच अगस्त तक इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद की गईं।
- रावलाकोट और मीरपुर में फायरिंग की घटनाओं के बाद कई लोगों की मौत और घायल होने की खबर सामने आई।
- प्रदर्शनकारी संगठनों ने हिंसा रोकने, जरूरी सेवाएं बहाल करने और पाबंदियां हटाने की मांग की।
अपने राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर गुलाम कश्मीर में जारी प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान पर बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पांच अगस्त तक पूरे क्षेत्र में संचार सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे यह इलाका लगभग बाकी दुनिया से कट गया है।
एजेंसियों का आकलन है कि इसके बाद विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए व्यापक कार्रवाई की जा सकती है। बुधवार देर शाम रावलाकोट क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में पांच और लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
पीओके में इंटरनेट सेवाएं बंद
बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का हवाला देते हुए पाकिस्तान ने गुलाम कश्मीर में मोबाइल डेटा और ब्रॉडबैंड (वाई-फाई) इंटरनेट सेवाओं को पांच अगस्त तक बंद कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद इन प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखने की तैयारी की जा रही है।
पीओके गृह विभाग के सचिव की ओर से जारी अधिसूचना में कानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने को इंटरनेट बंद करने का आधार बताया गया है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां इसे विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा मान रही हैं।
मीरपुर में भी हालात तनावपूर्ण
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रावलाकोट की घटनाओं के बाद मीरपुर में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बुधवार शाम कायद-ए-आजम चौक पर हुई फायरिंग में पांच लोगों की मौत और चार लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल मीरपुर में भर्ती कराया गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग
स्थानीय पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी हथियारों से लैस थे। वहीं, संयुक्त जन कार्रवाई समिति ने इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों ने बिना वजह बल प्रयोग किया। समिति का दावा है कि कार्रवाई में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
खाने और जरूरी सुविधाओं का संकट
ओवरसीज कश्मीरी संयुक्त जन कार्रवाई समिति ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में भोजन, दवाइयों, बिजली, इंटरनेट और अन्य आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
समिति ने संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुलाम कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का संज्ञान लेने और हस्तक्षेप करने की अपील की है।
ओवरसीज कश्मीरियों की प्रमुख मांगें
समिति ने रावलाकोट और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में शांतिपूर्ण नागरिकों एवं प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग, गोलाबारी और हिंसा रोकने की मांग की है।
इसके अलावा राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने तथा घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
समिति ने इंटरनेट, मोबाइल सेवाओं, टेलीफोन और बिजली पर लगी पाबंदियां हटाने और स्वतंत्र मीडिया को रिपोर्टिंग की अनुमति देने की भी मांग रखी है।
निहत्थे लोगों पर फायरिंग के विरोध में महिलाओं से अपील
जम्मू-कश्मीर जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी ने कश्मीरी लोगों के समर्थन और कथित तौर पर निहत्थे लोगों पर फायरिंग के विरोध में महिलाओं से विरोध रैली में शामिल होने की अपील की है।
जेकेजेपीएसी ने लगाए गंभीर आरोप
जम्मू-कश्मीर जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया और पूरे क्षेत्र को जेल जैसा बना दिया गया है। उन्होंने हजारों लोगों के लापता होने का भी दावा किया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मृतकों के शव पांच जून से सुरक्षा बलों के कब्जे में हैं। इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रीय मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया पर समिति के खिलाफ भ्रामक प्रचार किए जाने का आरोप लगाया।
समिति के अनुसार, जम्मू-कश्मीर जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े लोगों का साझा मंच है, जो पिछले 78 वर्षों से कथित जन-शोषण और नीतियों के विरोध में आंदोलन कर रहा है।
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