कौन हैं महिपाल सिंह? राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण के ‘स्टार विटनेस’ का RSS से रहा है पुराना नाता

HIGHLIGHTS
- महिपाल सिंह जनवरी 2021 से जुलाई 2022 तक ट्रस्ट से जुड़े रहे
- मार्च 2022 में उन्हें चढ़ावे की गणना से हटाया गया था
- महिपाल सिंह ने 2021-22 की ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र किया
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के स्टार विटनेस बनकर उभरे महिपाल सिंह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा (अकाउंट्स) प्रभारी रहे हैं। इसके साथ ही उनके पास सह कार्यालय प्रमुख की जिम्मेदारी भी रही। वह आरएसएस की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं।
कौन हैं महिपाल सिंह?
राजस्थान के कोटा में वर्ष 1959 में जन्मे महिपाल सिंह किशोरावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों और विचारों से प्रभावित रहे। महज नौ वर्ष की उम्र में वर्ष 1968 में उन्होंने संघ में बाल स्वयंसेवक के रूप में प्रवेश लिया। इसके बाद कोटा में संघ की शाखाओं के आयोजन से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहे।
शुरुआत से ही मेधावी छात्र रहे महिपाल सिंह को 21 वर्ष की उम्र में बैंक में नौकरी मिल गई। सहकारी बैंक में वह वर्ष 2019 तक कार्यरत रहे। 39 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने बैंक में कैशियर से लेकर क्षेत्रीय अधिकारी तक की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान भी वह संघ और विहिप के विभिन्न दायित्व निभाते रहे।
सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वह फिर से संघ के कार्यों में पूरी तरह सक्रिय हो गए। राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान में संघ ने उन्हें प्रमुख जिम्मेदारी दी। अभियान के तहत उन्हें कोटा विभाग क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया था। 55 संग्रहकर्ता उनके पास धनराशि जमा करते थे।
चढ़ावे की गणना से हटाए गए थे महिपाल
दैनिक जागरण से दूरभाष पर बातचीत में उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में एक काम के लिए उन्हें अयोध्या बुलाया गया था। यहां 10 महीने से दान और निधि समर्पण की रसीदें जारी नहीं हो पा रही थीं। इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी महिपाल को दी गई। उन्हें ट्रस्ट में लेखाधिकारी और सह कार्यालय प्रमुख का दायित्व सौंपा गया।
ट्रस्ट में उनका कार्यकाल जनवरी 2021 से मई/जुलाई 2022 के बीच राम कचहरी कार्यालय में लेखा प्रभारी के तौर पर रहा। उन्होंने बताया कि वह जनवरी 2021 से जुलाई 2022 तक राम मंदिर ट्रस्ट में कार्यरत थे, लेकिन मार्च 2022 में ही उन्हें चढ़ावे की गणना से हटा दिया गया।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बीच चर्चा में आए महिपाल सिंह ने मंदिर के दान और चढ़ावे में अनियमितताओं और गड़बड़ियों को लेकर कई खुलासे किए। उनका कहना है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित नहीं हैं और उनका वैचारिक परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। उन्होंने कोटा और उदयपुर के दो संघ कार्यालयों के प्रभारी का दायित्व निभाया। इसके अलावा वह विश्व हिंदू परिषद में राजस्थान के प्रांत सहसेवा प्रमुख भी रहे।
चंपतराय की वापसी के लिए क्लीन चिट की पृष्ठभूमि तैयार करने का आरोप
महिपाल सिंह अपनी बातों पर कायम हैं। बुधवार को दैनिक जागरण को उन्होंने बताया कि पुरानी एसआईटी ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट नहीं दे सकती। उन्होंने दावा किया कि दो सितंबर को होने वाली बैठक में चंपतराय की वापसी के लिए क्लीन चिट की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है।
उन्होंने दोहराया कि वर्ष 2021 से 22 की ऑडिट रिपोर्ट में कई तरह के आक्षेप लगाए गए हैं, जिनका ट्रस्ट ने निराकरण नहीं किया। गणना कर्मियों की तैनाती के बारे में उन्होंने बताया कि वाराणसी की एक एजेंसी से गणनाकर्मी रखे गए थे, लेकिन नियुक्ति चंपतराय और टिन्नू यादव करते थे। गणनाकर्मी रहे मनीष यादव का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि एक भी गणनाकर्मी को बैंकिंग का ज्ञान नहीं था। उनके अनुसार, इन लोगों ने अपने भरोसे के लोगों को तलाश कर नियुक्त किया।
उन्होंने चढ़ावे में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए कहा कि गिनती के दौरान नोटों के बंडल कम दिखाए जाते थे और अधिक मात्रा में पैसे निकाले जाते थे। दान पेटियों से निकलने वाली बहुमूल्य धातुओं, सोने और चांदी की उचित रसीद या प्रविष्टि नहीं किए जाने के भी आरोप लगाए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये थी, जबकि खर्च बढ़कर करीब 2,200 करोड़ रुपये हो गया।
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