राजस्थान: जर्जर स्कूल की छत की पट्टी गिरी, सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सड़क पर उतरे छात्र

HIGHLIGHTS
- जर्जर घोषित भवन में सिर्फ तीन कमरों में पढ़ाई कर रहे थे विद्यार्थी।
- नए स्कूल भवन का निर्माण तीन महीने में शुरू करने पर बनी सहमति।
- छह कमरों की मरम्मत एक सप्ताह में कराने का प्रशासन ने दिया भरोसा।
- शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति और खेल मैदान की मांग भी मानी गई।
राजस्थान के जोधावास गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में जर्जर भवन की छत की पट्टी टूटकर गिरने के बाद छात्रों का आक्रोश सामने आया। हादसे के समय कोई छात्र उसकी चपेट में नहीं आया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद छात्र अपनी सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। गुरुवार से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहा। दो दिन के आंदोलन के बाद प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया।
जर्जर भवन में तीन कमरों में पढ़ने को मजबूर छात्र
जोधावास गांव का सरकारी स्कूल लंबे समय से जर्जर भवन की समस्या से जूझ रहा है। विद्यालय भवन को पिछले वर्ष ही जर्जर घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद नए भवन का निर्माण नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को केवल तीन कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इनमें कुछ कमरों का इस्तेमाल स्टाफ रूम और प्रधानाचार्य कक्ष के तौर पर किया जा रहा है। बारिश के दौरान इन कमरों से भी पानी टपकने की शिकायत है।
छत की पट्टी गिरने के बाद शुरू हुआ धरना
बुधवार को स्कूल की जर्जर इमारत की छत की एक पट्टी अचानक टूटकर नीचे गिर गई। घटना के बाद छात्रों में दहशत फैल गई। इसके बाद विद्यार्थियों ने जर्जर भवन को हटाकर नया भवन बनाने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब भवन पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है तो उसे हटाने और नए भवन के निर्माण में देरी क्यों हो रही है।
शुक्रवार को भी धरने पर डटे रहे छात्र
शुक्रवार को छात्र और ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। स्थिति को देखते हुए एसडीएम मालाखेड़ा पिंकी गुर्जर, विकास अधिकारी विजय कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी अलवर मनोज शर्मा समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, छात्र केवल आश्वासन के बजाय समयबद्ध कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
सीजेपी की टीम भी पहुंची
शुक्रवार को आंदोलन स्थल पर सीजेपी की टीम भी पहुंची। सीजेपी के को-कन्वीनर आशुतोष रांका के नेतृत्व में टीम ने छात्रों और ग्रामीणों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों के साथ मांगों को लेकर चर्चा की गई। लंबी बातचीत के बाद प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
छह मांगों पर प्रशासन की सहमति
थानागाजी विकास अधिकारी विजय कुमार के अनुसार, छात्रों की छह प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इनमें जर्जर स्कूल भवन को ध्वस्त करना, शिक्षकों की नियुक्ति, नए विद्यालय भवन का तीन महीने में निर्माण शुरू करना, स्कूल के रास्ते की जर्जर पुलिया का निर्माण, छह कमरों की एक सप्ताह में मरम्मत और खेल मैदान का आवंटन शामिल है।
स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग
विद्यालय में शिक्षकों की कमी भी छात्रों के आक्रोश की एक बड़ी वजह रही। अधिकारियों की ओर से तृतीय श्रेणी के अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था का विकल्प रखा गया, लेकिन छात्रों और ग्रामीणों ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी मांग है कि लेक्चरर के पद स्वीकृत किए जाएं और रिक्त वरिष्ठ अध्यापक पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
सीबीईओ और भाजपा नेता पर बदतमीजी के आरोप
आंदोलन के दौरान कुछ छात्र-छात्राओं ने सीबीईओ और स्थानीय भाजपा नेता पर कथित बदतमीजी के आरोप लगाए। छात्रों ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने शिकायत सुनी और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
दो दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन
गुरुवार देर शाम तक छात्र धरना स्थल पर बैठे रहे। अभिभावकों के समझाने के बाद वे रात में घर लौटे, लेकिन शुक्रवार सुबह फिर धरने पर बैठ गए। छात्रों ने स्पष्ट किया था कि ठोस और समयबद्ध आश्वासन मिलने तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा। प्रशासन की ओर से मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद धरना समाप्त हुआ।
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