राजस्थान में सिजेरियन के बाद संकट: किडनी खराब हुई प्रसूताओं ने मांगी इच्छामृत्यु

HIGHLIGHTS
- राजस्थान में सिजेरियन प्रसव के बाद मौतों और किडनी खराब होने के मामलों से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप।
- कोटा में भर्ती चार प्रसूताओं ने किडनी ट्रांसप्लांट या इच्छामृत्यु की मांग की।
- सरकार ने गर्भवती महिलाओं की निगरानी और अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए नई गाइडलाइन जारी की।
जयपुर। राजस्थान के कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव के बाद प्रसूताओं की मौत और किडनी खराब होने के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले दो महीनों में पांच जिलों में 20 प्रसूताओं की मौत और 10 महिलाओं के किडनी प्रभावित होने की जानकारी सामने आने के बाद सरकार और स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है।
इस बीच कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किडनी खराब होने से जूझ रहीं चार प्रसूताओं ने बुधवार को मीडिया के सामने अपनी पीड़ा साझा की और इच्छामृत्यु की मांग कर दी। रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी और सुशीला ने कहा कि सरकार या तो उनका किडनी ट्रांसप्लांट कराए या फिर उन्हें जीवन समाप्त करने की अनुमति दी जाए।
इन प्रसूताओं का कहना है कि सिजेरियन डिलीवरी के बाद उनकी किडनी खराब हो गई और पिछले करीब दो महीने से वे नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती हैं। लगातार डायलिसिस के दौरान होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए उन्होंने डायलिसिस कराने से भी इनकार कर दिया।
राष्ट्रपति के नाम भेजा ज्ञापन
प्रसूताओं ने बुधवार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर अपनी मांग रखी। उनका कहना है कि डायलिसिस प्रक्रिया बेहद कष्टदायक है और लंबे समय तक इस स्थिति में रहना मुश्किल हो रहा है।
इससे पहले परिजनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर सरकार से मुफ्त किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था कराने की मांग की थी। परिवारों ने चेतावनी दी थी कि यदि इलाज की व्यवस्था नहीं हुई तो वे गंभीर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
जांच और कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
प्रसूताओं की मौत के मामलों को लेकर सरकार की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विपक्ष और पीड़ित परिवारों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई में देरी की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच कमेटी की शुरुआती रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन अब तक केवल कुछ अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद राजस्थान सरकार ने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की अलग निगरानी और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने अस्पतालों में जरूरी दवाओं, ब्लड की उपलब्धता, ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और ऑब्सटेट्रिक आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
नई व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं का शुरुआती 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। हाई रिस्क मामलों के लिए अलग चिकित्सकीय टीम गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ऑक्सीटोसिन और एनेस्थीसिया दवा पर रोक
मामलों की जांच के दौरान सामने आई खामियों के बाद सरकार ने सिजेरियन प्रसव में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और बुपीवाकेन एनेस्थीसिया दवा के उपयोग पर रोक लगाई है।
बताया गया कि प्रसव के बाद अधिक रक्तस्त्राव रोकने के लिए ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल किया जाता है। कोटा के मामलों की जांच में इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे।
किन जिलों में सामने आए मामले
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में मंगलवार देर रात एक और प्रसूता की मौत हो गई। यहां अब तक सिजेरियन प्रसव के बाद चार महिलाओं की मौत और चार के किडनी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में पांच, बांसवाड़ा में चार, कोटा में पांच और जोधपुर में दो प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। कोटा में सात महिलाओं की किडनी खराब होने की बात भी सामने आई थी।
चिकित्सा मंत्री ने बताया मौतों के अलग-अलग कारण
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रसूताओं की मौत के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि जांच में किडनी खराब होना, एनीमिया, प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव, पोषण की कमी समेत कई कारण सामने आए हैं।
चिकित्सा मंत्री ने मंगलवार को भीलवाड़ा और बुधवार को बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों का दौरा कर हालात की समीक्षा की।
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