रिकॉर्ड महंगाई बनी सराफा कारोबार पर भारी, पायल उद्योग डगमगाया

चांदी के दामों में आई तेज़ और अप्रत्याशित उछाल ने सराफा कारोबार की नींव हिला दी है। जिसे कभी सुरक्षित निवेश माना जाता था, वही चांदी अब व्यापारियों के लिए संकट का कारण बन गई है। उधारी में हुए सौदे अब भारी घाटे में बदल चुके हैं और करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं।
बुधवार को चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 3.30 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया। इसके साथ ही किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक, एमजी रोड, कमला नगर, सदर बाजार और कारगिल चौराहा जैसे प्रमुख सराफा केंद्रों में लेनदेन लगभग ठप हो गया। जिस चमक से कारोबार चलता था, वही तेज़ी अब घाटे की वजह बन गई है।
कच्चे सौदों पर सबसे ज्यादा मार
तेजी का सबसे बड़ा असर उन सौदों पर पड़ा है, जिनमें बिना तय रेट के नकद देकर माल लिया गया था। जब चांदी 1.25 से 1.75 लाख रुपये प्रति किलो थी, तब करोड़ों रुपये का माल उधारी पर उठाया गया। अब दाम तीन गुना से ज्यादा हो जाने से व्यापारी भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं।
जहां पहले 200 से 300 करोड़ रुपये तक का लेनदेन होता था, वहीं अब यह सिमटकर 50 से 100 करोड़ रुपये की सेटलमेंट तक रह गया है। पुराने रेट पर भुगतान संभव नहीं है और नए रेट पर खरीद भी मुश्किल हो गई है। इसी कारण अधिकांश व्यापारी उधारी पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
आगरा का पायल उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित
आगरा को चांदी की मंडी के रूप में जाना जाता है और यह देश में पायलों का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र है। यहां हर महीने औसतन 50 टन चांदी की खपत होती थी। लेकिन पिछले एक महीने से किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक और एमजी रोड जैसे क्षेत्रों में ग्राहकों की भारी कमी देखी जा रही है।
महंगे दामों के चलते मध्यमवर्ग ने चांदी से दूरी बना ली है, जिसका सीधा असर पायल कारोबार पर पड़ा है।
उधारी संकट से निकलने की कोशिश
हाल के दिनों में लखनऊ में एक बड़े व्यापारी की आत्महत्या और मथुरा में 800 किलो चांदी लेकर एक युवक के लापता होने जैसी घटनाओं ने सराफा बाजार में डर का माहौल बना दिया है।
इन हालात में कारोबारी अब उधारी की जबरन वसूली के बजाय आपसी समझौते का रास्ता तलाश रहे हैं। बातचीत और सुलह के ज़रिये नुकसान बांटने की कोशिश की जा रही है, ताकि बाजार पूरी तरह बिखरने से बच सके।
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