‘सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद’, SIR याचिका पर संजय राउत बोले- गलती हुई तो माफी मांगने को तैयार

HIGHLIGHTS
- संजय राउत ने एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर दायर याचिकाओं का जिक्र किया।
- उन्होंने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने को लेकर लोगों की चिंताओं पर बात की।
- राउत ने कहा कि अदालत को उनकी किसी बात पर आपत्ति हो तो वह माफी मांगने को तैयार हैं।
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर कानूनी याचिका पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न्याय की उम्मीद रखने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट अंतिम सहारा है। अगर अदालत को उनकी किसी बात या कार्रवाई पर आपत्ति है, तो वह माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
संजय राउत ने उन खबरों पर प्रतिक्रिया दी, जिनमें दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट याचिका और उसे दायर करने की परिस्थितियों से नाखुश है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग, राज्यपाल या अन्य संस्थाओं से राहत नहीं मिलती, तो सुप्रीम कोर्ट का रुख करना संवैधानिक उपाय है।
राउत ने कहा, 'देश का सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था है। जब न्याय के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं। चाहे वह चुनाव आयोग हो, राज्यपाल हों या कोई अन्य संस्था, तो अंत में हम सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं और न्याय की गुहार लगाते हैं।'
सुप्रीम कोर्ट को बताया न्याय की आखिरी उम्मीद
संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट को उम्मीद की अंतिम किरण बताते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर याचिकाएं दायर की गई हैं। उन्होंने उन लोगों की चिंताओं का भी उल्लेख किया, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि उनसे कोई गलती हुई है, तो अदालत को इस पर ध्यान देने का पूरा अधिकार है। राउत ने कहा कि अगर अदालत को उनके बारे में ऐसा लगता है, तो उन्हें इसका खेद है और वह माफी मांगने में संकोच नहीं करेंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य न्याय सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, वे न्याय चाहते हैं और देश भी न्याय की अपेक्षा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा करना न्यायपालिका की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
संजय राउत ने माफी मांगने की बात क्यों कही?
राउत ने कहा, 'मैं आपसे दस बार माफी मांगता हूं, लेकिन इस देश और इसके लोकतंत्र को बचाना आपकी जिम्मेदारी है। हम अंत तक आपके समक्ष न्याय की गुहार लगाते रहेंगे।'
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि जब लाखों लोग राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, तो उनकी एकमात्र उम्मीद अदालत से न्याय पाना थी।
राउत ने न्यायपालिका पर अपना भरोसा दोहराते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही उम्मीद की आखिरी किरण है। उन्होंने कहा कि अगर लोग न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय की ओर भी नहीं देख सकते, तो उनके पास कहीं और जाने का कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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