सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, लखनऊ PGI में ली अंतिम सांस

HIGHLIGHTS
- राम गोविंद चौधरी ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी।
- उनका जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था।
- उन्होंने स्नातक के बाद एलएलबी की पढ़ाई की थी।
बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। सपा के नवागत जिला अध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि वह लखनऊ के लिए रवाना हो रहे हैं।
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर बलिया की राजनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा की राजनीति से भी लंबे समय तक जुड़ा रहा। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चौधरी ने कई दशकों तक विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। वह आठ बार विधायक रहे और 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राम गोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. द्वारिका चौधरी था। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई के बाद एलएलबी की शिक्षा हासिल की। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक और एलएलबी दर्ज है। पेशे से वह अधिवक्ता रहे।
राजनीति में आने से पहले चौधरी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था।
1977 में पहली बार विधायक बने
राम गोविंद चौधरी ने 1977 में चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1980, 1985 और 1989 में भी उन्होंने विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। 1991 में भी वह विधायक चुने गए।
बाद के वर्षों में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से चुनावी राजनीति की। विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में उन्हें आठ बार निर्वाचित सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।
उनके राजनीतिक जीवन पर चंद्रशेखर और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं का प्रभाव रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में चौधरी चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं।
मुलायम सिंह यादव की सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
वर्ष 2002 के बाद राम गोविंद चौधरी समाजवादी राजनीति में और सक्रिय हुए। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 2003 से 2007 तक वह मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में शामिल रहे।
इसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में भी उन्होंने मंत्री पद संभाला। इस दौरान उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। सरकार के साथ-साथ संगठन और विधानसभा की कार्यवाही में भी उनका राजनीतिक अनुभव काम आया।
2012 में बांसडीह से जीते चुनाव
2012 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। चुनाव जीतने के बाद वह अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बने।
विधानसभा के रिकॉर्ड में मार्च 2012 से मार्च 2017 तक अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में उनकी भूमिका दर्ज है।
2017 में बने नेता प्रतिपक्ष
2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने विधानसभा में राम गोविंद चौधरी को नेता प्रतिपक्ष बनाया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक सूची में 27 मार्च 2017 से नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनका नाम दर्ज रहा। इस भूमिका में उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की ओर से सरकार की नीतियों और विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए।
विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार, उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।
2022 में चुनावी हार का सामना
2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह सीट से एक बार फिर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें हरा दिया।
बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में पहली बार भाजपा का खाता खुला और आठ बार विधायक रहे राम गोविंद चौधरी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
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