ममता बनर्जी गुट को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बागी विधायकों की अयोग्यता मामले में हाई कोर्ट जाने की सलाह

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।
- कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बागी विधायकों की अयोग्यता के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को कहा।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने हाई कोर्ट में जल्द सुनवाई का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी समर्थक गुट के नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को बागी विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चट्टोपाध्याय की याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें हाई कोर्ट में उचित याचिका दाखिल करने की अनुमति दी। साथ ही पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि मामले को जल्द सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच के सामने रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को जल्द सुनवाई का दिया सुझाव
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वह 8 जुलाई को दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला करें।
चट्टोपाध्याय की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता संबंधी याचिकाएं जुलाई में दाखिल की गई थीं। हालांकि, पांच महीने गुजर जाने के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाना चाहिए। अदालत ने इस स्तर पर याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें हाई कोर्ट में उचित याचिका दाखिल करने की छूट दी। इसके अलावा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि मामले को तत्काल विचार के लिए डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए और जल्द फैसला सुनाया जाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने जल्द फैसले की मांग की
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि अदालत उनकी बात समझ रही है, लेकिन अपनी बारी से पहले सुनवाई कराने के लिए कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती।
इस पर वकील ने पीठ से आग्रह किया कि कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच को मामले पर विचार करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह मामला हाई कोर्ट के भीतर अपील के एक और दौर में न उलझ जाए।
वकील ने कहा कि उनकी मांग केवल इतनी है कि मामले का जल्द निपटारा किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल से संबंधित इस अदालत का पहले से एक आदेश मौजूद है।
'हर याचिका सुप्रीम कोर्ट में नहीं लाई जा सकती'
इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अदालत को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है। हालांकि, किसी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने का यह अर्थ नहीं है कि सभी याचिकाएं सीधे शीर्ष अदालत में लाई जाएं।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट में 11 नवंबर तक छुट्टियां हैं।
10 TMC विधायकों के खिलाफ दाखिल हुई थीं अयोग्यता याचिकाएं
इस साल 8 जुलाई को TMC के विधायकों ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमां अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
इन विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने TMC के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद अपना राजनीतिक पाला बदल लिया।
कैसे शुरू हुआ TMC में गुटों के बीच विवाद?
भारतीय जनता पार्टी से चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर हुए घटनाक्रम ने पार्टी में दो गुटों के बीच विवाद को जन्म दिया। इससे पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए नामित किया था।
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने बागी TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। इसके साथ ही बागी गुट के एक अन्य विधायक को मुख्य सचेतक नियुक्त कर दिया गया।
इस फैसले के खिलाफ 18 जून को शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए अपने नामांकन को खारिज किए जाने और ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी थी।
हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 जून को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
वहीं, बागी गुट ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC के कुल विधायकों में से 58 विधायक उसके समर्थन में हैं।
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