गोरखपुर एम्स की कार्यकारी निदेशक को इलाज के लिए जाना पड़ा निजी अस्पताल, कैथ लैब की कमी आई सामने

HIGHLIGHTS
- आवास पर अचानक बेहोश हुईं कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता।
- एम्स की इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद निजी अस्पताल भेजा गया।
- कैथ लैब की सुविधा नहीं होने से संस्थान की तैयारियों पर उठे सवाल।
गोरखपुर। पूर्वांचल के गंभीर मरीजों के इलाज की बड़ी उम्मीद माने जाने वाले एम्स की स्वास्थ्य सुविधाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। अब तक अस्पताल में संसाधनों की कमी से आम मरीजों को परेशानी होती रही है, लेकिन बुधवार को संस्थान की कार्यकारी निदेशक (ईडी) डा. विभा दत्ता को भी इलाज के लिए निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।
अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सबसे पहले एम्स की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्हें निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसकी वजह एम्स में अब तक कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध नहीं होना बताया जा रहा है। यदि संस्थान में कैथ लैब होती तो उनका उपचार यहीं संभव हो सकता था।
जानकारी के अनुसार, डा. विभा दत्ता अपने आवास पर अचानक बेहोश हो गई थीं। इसके बाद उन्हें तत्काल एम्स की इमरजेंसी में लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उनका इलाज किया। बाद में उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया। इसके लिए एंबुलेंस के आवागमन का रास्ता खाली कराया गया और चिकित्सकों की टीम की मौजूदगी में उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया गया।
एम्स की मीडिया सेल के मुताबिक, डा. विभा दत्ता अब स्वस्थ हैं। उनकी सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आई हैं। गुरुवार को वह कार्यालय भी पहुंचीं और नियमित कामकाज किया। इसके अलावा आयुष विंग में मेडिकल ऑफिसर के पद के लिए आयोजित इंटरव्यू में भी शामिल हुईं।
एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान की कार्यकारी निदेशक को ही इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ने की घटना पूरे दिन चर्चा में रही। मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी इसे लेकर सवाल उठते रहे। आमतौर पर दूसरे अस्पतालों से गंभीर मरीजों को रेफर कर एम्स भेजा जाता है, लेकिन संस्थान की प्रमुख को ही बाहर इलाज कराना पड़ा। इससे एम्स की चिकित्सा सुविधाओं और तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कैथ लैब की सुविधा नहीं होने का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एम्स की शुरुआत फरवरी 2029 में हुई थी, लेकिन सात साल बाद भी कैथ लैब स्थापित नहीं हो सकी है। इसका सामना संस्थान की कार्यकारी निदेशक को भी करना पड़ा। डा. विभा दत्ता ने 30 जनवरी 2025 को एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले वह वर्ष 2018 से 2023 तक एम्स नागपुर की निदेशक रह चुकी हैं। वह गोरखपुर एम्स की पांचवीं कार्यकारी निदेशक हैं।
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