यूजीसी नियमों पर घमासान, कविता के जरिए कुमार विश्वास का हमला

नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के संशोधित समता नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अब प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिवंगत कवि रमेश रंजन की एक कविता साझा करते हुए नए यूजीसी कानून के विरोध में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
कुमार विश्वास ने पोस्ट में लिखा—
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…”
इस कविता के जरिए उन्होंने उन वर्गों की पीड़ा को सामने रखने की कोशिश की है, जो खुद को नए नियमों से प्रभावित मान रहे हैं।
सवर्ण समाज में नाराज़गी, सरकार तलाश रही समाधान
यूजीसी के नए समता संवर्धन नियमों को लेकर सवर्ण समाज के कई संगठन विरोध जता रहे हैं। लगातार बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने भी इस विषय पर पुनर्विचार और संतुलित समाधान निकालने के संकेत दिए हैं।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा, धरने पर बैठे
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब बरेली के पीसीएस अधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने मंगलवार को बरेली डीएम कार्यालय के बाहर धरना भी दिया और नए कानून पर आपत्ति जताई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बदले गए नियम
यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद 2026 के लिए समता संवर्धन नियमों में बदलाव किया है। इन्हीं संशोधनों को लेकर देशभर में बहस और विरोध तेज हो गया है। आइए जानते हैं इन प्रमुख बदलावों के बारे में—
समता नियमों में क्या बदला?
1. भेदभाव की परिभाषा का विस्तार
अब भेदभाव की श्रेणी पहले से अधिक व्यापक कर दी गई है। 2012 के नियमों की तुलना में 2026 के नियमों में एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी छात्रों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
2. झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटाया गया
पहले नियमों में झूठी शिकायत करने पर जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान था, जिसे अब हटा दिया गया है, ताकि वास्तविक पीड़ित बिना डर के अपनी बात रख सकें।
3. सख्त निगरानी व्यवस्था
हर उच्च शिक्षण संस्थान में समता दस्ता और समता दूत नियुक्त करना अनिवार्य होगा।
भेदभाव की शिकायत मिलने पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देना जरूरी होगा।
यदि मामला दंडनीय है, तो पुलिस को तुरंत सूचित किया जाएगा।
4. संस्थानों पर जवाबदेही
नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर यूजीसी कड़ी कार्रवाई कर सकता है। इसमें डिग्री जारी करने, वित्तीय सहायता और ऑनलाइन पाठ्यक्रमों पर रोक तक शामिल है।
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