UNSC में सुधार जरूरी, ‘1945 की दुनिया बदल चुकी’, भारत ने सुरक्षा परिषद के विस्तार की उठाई मांग

HIGHLIGHTS
- भारत ने UNSC के प्रतिबंध संबंधी फैसलों में अधिक पारदर्शिता की मांग की।
- योजना पटेल ने परिषद में राजनीतिक हितों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
- 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के कामकाज पर भारत ने सवाल उठाए।
नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रतिबंधों से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की। भारत ने कहा कि इस प्रभावशाली संस्था की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसे पाकिस्तान की आतंकवाद से निपटने की भूमिका पर परोक्ष आलोचना के तौर पर देखा गया।
परिषद के कामकाज के तरीकों पर बुधवार को हुई खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रभारी राजदूत योजना पटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
भारत ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, योजना पटेल ने कहा, "सुरक्षा परिषद में मौजूदगी का इस्तेमाल आतंकवादियों को वैध ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। चाहे उन्हें सूची से हटाने की कोशिश हो या फिर बिना किसी ठोस आधार या दस्तावेज के सिर्फ राजनीतिक कारणों से किसी अन्य संस्था को आतंकवादी संगठन घोषित करना हो।"
भारत लंबे समय से आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों को नामित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाता रहा है। हालांकि मंजूर की गई सूचियां सार्वजनिक की जाती हैं, लेकिन भारत ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि प्रस्तावों को खारिज करने या उन पर तकनीकी रोक लगाने के कारणों की जानकारी नहीं दी जाती।
भारत ने किसकी ओर किया इशारा?
भारत पहले भी इस प्रक्रिया को "छिपा हुआ वीटो" बता चुका है और खास तौर पर 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के कामकाज पर सवाल उठाता रहा है। पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों को नामित करने के भारत के प्रयासों का भी विरोध हुआ है। परिषद के स्थायी सदस्य चीन ने कुछ प्रस्तावों को रोक दिया है या उन पर होल्ड लगाया है।
UNSC की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग
भारतीय राजनयिक ने परिषद की सहायक संस्थाओं के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। साल 2026 के आठ महीने बीतने के बाद भी कई पद खाली हैं। इनमें 1267 अल-कायदा और तालिबान प्रतिबंध समितियों की देखरेख करने वाले पद भी शामिल हैं।
उन्होंने नियुक्तियों को पूरा करने के लिए एक निश्चित और बिना किसी समझौते वाली समय-सीमा तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देरी का असर सहायक निकायों के कामकाज पर पड़ा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन सहित प्रमुख प्रक्रियाओं में परिषद के चुने हुए गैर-स्थायी सदस्यों की अधिक भागीदारी की भी मांग की।
योजना पटेल ने कहा कि परिषद के ढांचे और कामकाज के तरीकों में 1945 के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में आए बदलावों को शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उस समय से संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चार गुना बढ़ चुकी है।
पटेल ने कहा, "1945 की दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है।"
उन्होंने कहा, "80 साल पहले हुए एक संघर्ष का नतीजा हमेशा के लिए काउंसिल के गठन, कामकाज के तौर-तरीकों, दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली को तय नहीं कर सकता। इसमें बदलाव की जरूरत है और यह जल्द से जल्द होना चाहिए।"
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