यूपी को मिला नया एक्सप्रेसवे, लखनऊ से कानपुर की दूरी अब होगी और आसान

HIGHLIGHTS
- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जनता के लिए शुरू, अब दोनों शहरों के बीच 3 घंटे का सफर घटकर 35-45 मिनट रह जाएगा।
- 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे में स्मार्ट टोलिंग, एआई आधारित निगरानी और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- एक्सप्रेसवे से लखनऊ-कानपुर क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक विकास, रोजगार और तेज माल परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहर कानपुर के बीच सफर अब पहले से कहीं तेज और आसान हो गया है। 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (नेशनल एक्सप्रेसवे-6) को जनता के लिए खोल दिया गया है। इसके शुरू होने से दोनों शहरों के बीच लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले लखनऊ से कानपुर पहुंचने में करीब ढाई से तीन घंटे तक का समय लग जाता था, लेकिन अब यह दूरी लगभग 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इस एक्सप्रेसवे को करीब 4,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
2018 में शुरू हुई थी परियोजना, आधुनिक तकनीक से हुआ निर्माण
लखनऊ और कानपुर के बीच बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए वर्ष 2018 में इस परियोजना की योजना तैयार की गई थी। मार्च 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी आधारशिला रखी थी।
बाद में केंद्र सरकार ने इसे नेशनल एक्सप्रेसवे-6 का दर्जा दिया। निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने परियोजना को दो हिस्सों में बांटा था।
दो हिस्सों में पूरा हुआ एक्सप्रेसवे का निर्माण
एक्सप्रेसवे का पहला हिस्सा करीब 18 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन है, जो लखनऊ के अमौसी और शहीद पथ क्षेत्र से जुड़ा है। घनी आबादी और भूमि अधिग्रहण जैसी चुनौतियों के बावजूद इसे आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से तैयार किया गया।
दूसरा हिस्सा करीब 45 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड सेक्शन है, जो लखनऊ और उन्नाव के कई गांवों से होकर गुजरता है। इस हिस्से का निर्माण नई भूमि पर किया गया है।
टोल प्लाजा पर नहीं रुकेंगे वाहन, फास्टैग से कटेगा शुल्क
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्मार्ट टोल व्यवस्था है। यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं। वाहन चलते हुए ही टोल भुगतान कर सकेंगे।
एडवांस फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए टोल राशि अपने आप कट जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और टोल पर लगने वाले जाम से भी राहत मिलेगी।
सुरक्षा के लिए हाईटेक निगरानी व्यवस्था
एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के लिए हाई डेफिनिशन कैमरे, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और स्पीड रडार लगाए गए हैं। तेज रफ्तार या किसी अन्य नियम उल्लंघन की स्थिति में कंट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे के दोनों ओर बड़ी संख्या में पौधे भी लगाए गए हैं, जिससे इसे ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा सके।
निवेश और औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार
छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक विस्तार योग्य बनाया गया है। इसके शुरू होने से रोजाना यात्रा करने वाले कर्मचारियों, छात्रों, व्यापारियों और उद्योगों से जुड़े लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे लखनऊ-कानपुर क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, माल परिवहन और प्रस्तावित स्टेट कैपिटल रीजन के विकास को नई गति देगा।
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