यूपी: जूली हत्याकांड का खुलासा, प्रेमी ने कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिलाकर की हत्या; 3 गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- उन्नाव जूली हत्याकांड का खुलासा: पुलिस ने महिला की हत्या के मामले में उसके प्रेमी प्रॉपर्टी डीलर राधाकांत दुबे समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- सीसीटीवी फुटेज से खुला राज: जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर पुलिस हत्या की साजिश तक पहुंची।
- शव ठिकाने लगाने में मदद का आरोप: पुलिस के अनुसार, एक दोस्त और महिला स्टाफ नर्स की मदद से शव को ठिकाने लगाया गया था।
उन्नाव में महिला जूली हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि महिला की हत्या उसके प्रेमी प्रॉपर्टी डीलर ने की थी। शव को ठिकाने लगाने में उसके दोस्त और परिचित स्टाफ नर्स ने मदद की थी। करीब 10 दिन पहले हुई इस हत्या के मामले में पुलिस ने लखनऊ निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, मृतका जूली भी लखनऊ की रहने वाली थी और अविवाहित थी। मुख्य आरोपी और उसके साथी को पहले भी अलग-अलग हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। फिलहाल दोनों हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर थे।
पुलिस लाइन में पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि छह जुलाई को दोपहर करीब 2:30 बजे बिहार-मौरावां मार्ग पर केदारखेड़ा नहर पुलिया के पास एक युवती का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गंभीर चोट लगने से मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद बिहार थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर स्वाट और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया।
पुलिस ने शव मिलने वाले रास्ते पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की, जिसमें एक कार रात के समय आती और फिर वापस जाती दिखाई दी। फुटेज के आधार पर स्वाट टीम लखनऊ के राजाजीपुरम पहुंची। वहां मिले एक सीसीटीवी फुटेज में पांच जुलाई की रात करीब 12:30 बजे एक कार से एक महिला नर्स को बैठाते और सुबह करीब 4:30 बजे उसे छोड़ते देखा गया। इस सुराग के आधार पर पुलिस ने नर्स से पूछताछ की, जिसके बाद हत्या की पूरी कहानी सामने आई।
उमेशचंद्र से पूछताछ में खुला मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना में इस्तेमाल कार लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के रहीमनगर भदेशुआ निवासी उमेशचंद्र यादव की थी। पूछताछ में उमेशचंद्र ने बताया कि लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र के सरदारीखेड़ा निवासी राधाकांत दुबे उर्फ कुक्कू ने पड़ोस में रहने वाली जूली (40) पुत्री किशन की हत्या की थी।
उमेश के अनुसार, शव को ठिकाने लगाने के लिए राधाकांत ने उसे कार लेकर बुलाया था। रास्ते में किसी को शक न हो, इसके लिए राधाकांत ने अपनी प्रेमिका और केजीएमयू में संविदा पर कार्यरत स्टाफ नर्स सुमन वर्मा को भी एक बीमार व्यक्ति को देखने के बहाने साथ बुलाया।
पुलिस के मुताबिक, राधाकांत दुबे और सुमन वर्मा मूल रूप से अयोध्या जिले के रहने वाले हैं। दोनों के बीच काफी समय से नजदीकी थी और सुमन का खर्च भी राधाकांत ही उठाता था। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। साथ ही वारदात में इस्तेमाल कार भी बरामद कर ली गई है।
साथ रहने का दबाव बनाने पर हत्या का आरोप
सीओ मधुपनाथ मिश्रा ने बताया कि पूछताछ में राधाकांत दुबे ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है और कमीशन से अच्छी कमाई होती है। उसने बताया कि फरवरी 2025 में सरदारीखेड़ा में पुराना मकान खरीदकर उसे तोड़कर नया निर्माण कराया था। उसकी पत्नी सीतापुर के महमूदाबाद स्थित कस्तूरबा स्कूल में शिक्षिका है और बेटी भी वहीं क्लर्क है।
पुलिस के अनुसार, मकान निर्माण के दौरान जूली का वहां आना-जाना बढ़ गया और दोनों के बीच नजदीकियां हो गईं। जूली अविवाहित थी। पुलिस ने बताया कि साल 2022 में उसकी गोदभराई हुई थी, लेकिन शादी से पहले ही रिश्ता टूट गया था। इसके बाद वह घरों में काम करने लगी थी।
आरोप है कि बाद में जूली दोनों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने लगी थी। साथ ही वह घर में हिस्सा मांगने और साथ रहने का दबाव बना रही थी। पुलिस के अनुसार, इसी से परेशान होकर राधाकांत ने उसे पांच मई की दोपहर दोस्त के खाली पुराने मकान में बुलाया और कोल्डड्रिंक में नींद की दवा मिलाकर पिला दी। बेहोश होने के बाद ईंट से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस के मुताबिक, किसी को शक न हो इसके लिए रात में उमेशचंद्र को कार सहित बुलाया गया और सुमन वर्मा को भी साथ ले लिया गया। महिला को साथ रखने का उद्देश्य यह दिखाना था कि वे परिवार की किसी महिला का इलाज कराने जा रहे हैं।
भाई ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप
जूली के बड़े भाई सतीश गौतम ने आरोप लगाया कि लखनऊ पुलिस ने उनकी शिकायत पर समय रहते कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि पांच जुलाई को पिता श्रीकृष्ण के साथ वे कृष्णानगर थाने पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें दो दिन तक बैठाए रखा गया। इसके बाद सात जुलाई को गुमशुदगी दर्ज की गई।
सतीश के अनुसार, जूली राधाकांत दुबे से काफी प्रभावित थी और विरोध करने पर कई बार खुद पुलिस बुला लेती थी। इसी वजह से परिवार ने उससे दूरी बना ली थी।
राधाकांत और उमेश को पहले भी हो चुकी है उम्रकैद
थानाध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया कि राधाकांत दुबे पर साल 2006 में एक सिपाही की हत्या का आरोप लगा था। उसके खिलाफ कृष्णानगर थाने में हत्या, गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट समेत 18 मामले दर्ज हैं। सिपाही हत्या मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी हो चुकी है।
वहीं, उमेशचंद्र यादव के खिलाफ लखनऊ के अलग-अलग थानों के अलावा पुरवा कोतवाली में भी सात मामले दर्ज हैं। उसे भी आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। पुलिस के अनुसार, दोनों की दोस्ती जेल में हुई थी और दोनों फिलहाल जमानत पर बाहर थे। राधाकांत दुबे ठेकेदारी का काम करता था, जबकि उमेशचंद्र गाड़ियां चलवाता था।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.