अखिलेश यादव का योगी सरकार पर हमला, बोले- छवि चमकाने में खर्च किए 7 हजार करोड़ रुपये

HIGHLIGHTS
- अखिलेश यादव ने एक्स अकाउंट के जरिए योगी सरकार पर निशाना साधा।
- सपा प्रमुख ने प्रदेश में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।
- उन्होंने दावा किया कि इतनी राशि शिक्षा क्षेत्र में लगती तो नई यूनिवर्सिटी स्थापित की जा सकती थीं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञापन खर्च को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता के टैक्स के करीब 7,000 करोड़ रुपये अपनी छवि को बेहतर दिखाने में खर्च कर दिए, जबकि प्रदेश में शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश की जरूरत है।
अखिलेश यादव ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि मुख्यमंत्री ने अपनी "झूठी छवि को सच्ची दिखाने" के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए "अवांछनीय और निंदनीय" बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अभी भी गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, एमएसपी, बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना कर रहा है।
'शिक्षा में निवेश से युवाओं का भविष्य बेहतर हो सकता था'
सपा प्रमुख ने दावा किया कि अगर इतनी बड़ी राशि शिक्षा के क्षेत्र में खर्च की जाती तो 'केजी से पीजी और रिसर्च' तक की दो-तीन विश्वस्तरीय यूनिवर्सिटी बनाई जा सकती थीं। इससे प्रदेश के बच्चों और युवाओं के भविष्य को बेहतर दिशा मिल सकती थी।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षा और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने "नियो इंडिया" का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार उत्तर प्रदेश को विकास और खुशहाली के रास्ते पर आगे ले जाएगी।
एक्सप्रेसवे को लेकर भी योगी सरकार पर साधा निशाना
इससे पहले छह अगस्त को भी अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा था। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर चल रहे विवाद के बीच उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया था।
उद्घाटन के कुछ दिनों बाद सड़क धंसने और मरम्मत के दौरान पंखों से सड़क सुखाने का वीडियो वायरल होने के बाद अखिलेश यादव ने सरकार पर तंज कसा।
उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- 'भाजपाई तरक्की की नई हवा'। अखिलेश यादव ने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का कुछ दिन पहले उद्घाटन हुआ हो, उसे इतनी जल्दी बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि मरम्मत किए जा रहे हिस्से को जल्द सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थिति और हास्यास्पद लगती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही एक्सप्रेसवे को कई बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है, तो उस पर तेज रफ्तार से यात्रा करने का जोखिम कौन उठाएगा।
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