संभल बवाल रिपोर्ट पर सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क बोले- जान हमारी गई, आरोपी भी हमें ही बना दिया

HIGHLIGHTS
- इकबाल महमूद ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
- सपा नेताओं ने संभल घटना से जुड़े कई आरोपों पर सरकार से जवाब मांगा।
- विधायक ने 1978 के दंगों से जुड़े आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठाए।
सांसद और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता जियाउर्रहमान बर्क ने संभल बवाल को लेकर न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि घटना में जान हमारी गई, लेकिन अपराधी भी हमें ही बताया जा रहा है।
बर्क ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग के गठन के बाद उम्मीद थी कि संभल के लोगों को न्याय मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद भी अब खत्म हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गठित होने वाले न्यायिक जांच आयोग इसी तरह की रिपोर्ट तैयार करते हैं।
बृहस्पतिवार को संभल के दीपा सराय स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद बर्क ने कहा कि उस समय पुलिस ने गोली चलाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच निहत्थे लोगों की जान चली गई। यह जुल्म की हद है। उन्होंने कहा कि सौ से अधिक निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया है और कई परिवारों के पास अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बर्क ने कहा कि बवाल वाले दिन प्रशासन के साथ पूरा सिस्टम मौजूद था। ड्रोन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही थी। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन की ओर से अब तक ऐसा कोई फोटो या वीडियो सामने नहीं आया है, जिसमें आम लोगों के हाथों में हथियार दिखाई दे रहे हों या किसी को गोली चलाते हुए देखा गया हो।
उन्होंने कहा कि आम लोगों के पास कोई हथियार नहीं था, इसके बावजूद उन्हीं लोगों को आरोपी बना दिया गया। उन्होंने इसे अन्याय की पराकाष्ठा बताया।
रामपुर सांसद ने राजनीतिक रंजिश का लगाया आरोप
रामपुर से सपा सांसद मोहिबुल्ला नदवी ने कहा है कि सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और संभल विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल का नाम राजनीतिक रंजिश के चलते शामिल किया गया है।
मोहिबुल्ला नदवी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत की। उनका बयान सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि संभल बवाल में पुलिस की गोली से पांच लोगों की मौत हुई थी। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी लोगों को सही दिशा दिखाना होती है, किसी को उकसाना नहीं।
विधायक इकबाल महमूद ने आयोग की रिपोर्ट पर जताई आपत्ति
संभल विधायक और सपा नेता इकबाल महमूद ने न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वह सेवानिवृत्त कर्मचारियों से बने इस आयोग को न्यायिक जांच आयोग नहीं मानते हैं। उनके अनुसार, यह सरकार के सेवानिवृत्त लोगों का आयोग था, जिसने सरकार की सोच के अनुसार रिपोर्ट तैयार की है।
बृहस्पतिवार को सदन में पेश की गई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता मौजूदा न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए थी, तभी पूरी घटना की वास्तविकता सामने आ सकती थी।
उन्होंने कहा कि संभल से न तो हिंदुओं का पलायन हुआ और न ही किसी मंदिर पर कब्जा किया गया था। हालांकि, दो-तीन विवाद जरूर हुए हैं।
विधायक ने 1978 के दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को भी गलत जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 1978 के दंगे में बड़ी संख्या में लोगों की हत्या की बात कहते हैं, जबकि सदन में उन्होंने खुद बताया था कि उस समय नौ लोगों की जान गई थी। अगर इससे ज्यादा लोगों की मौत हुई है तो सरकार को इसे साबित करना चाहिए।
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