4 साल की दुष्कर्म पीड़िता की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दो अस्पतालों को 12 लाख मुआवजा देने का आदेश
By Hitesh — August 7, 2026

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले में एसआईटी की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया।
- अदालत ने गंभीर अपराधों के पीड़ितों के इलाज को लेकर दिशानिर्देश जारी करने की बात कही।
- एसआईटी रिपोर्ट में बच्ची के कई घंटे तक जीवित रहने का उल्लेख किया गया।
Author: — Dainik Dehat
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों को चार वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में उसके परिवार को मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने सुपर स्पेशियलिटी सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल को 10 लाख रुपये और खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों अस्पतालों ने बच्ची को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
अदालत ने यह भी कहा कि गंभीर अपराधों के पीड़ितों के इलाज और ऐसे मामलों की जांच के दौरान अस्पतालों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारियों को लेकर वह जल्द ही व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगी।
एसआईटी रिपोर्ट में क्या आया सामने?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट पर संज्ञान लिया।
एसआईटी रिपोर्ट में कहा गया कि गंभीर चोटों और लगातार खून बहने के बावजूद बच्ची करीब पांच घंटे तक जीवित थी। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित अस्पतालों ने उसे जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं कराई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
किस अस्पताल को कितना मुआवजा देना होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के सुपर स्पेशियलिटी सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल को पीड़िता के पिता को 10 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है।
वहीं, खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये का मुआवजा चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने को कहा गया है।
घटना के दिन क्या हुआ था?
आरोप है कि 16 मार्च को पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चार वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। काफी समय तक बच्ची के घर वापस नहीं आने पर उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की।
बाद में बच्ची बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिली। परिजन उसे इलाज के लिए सबसे पहले दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद बच्ची को गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में इस मामले की सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने और जांच में कथित लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई थी।
पीड़िता के पिता ने क्या मांग की थी?
पीड़िता के पिता, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की थी।
10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के कथित असंवेदनशील रवैये पर सख्त टिप्पणी की थी।
इसके बाद अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ), दोनों अस्पतालों और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किए थे।
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