शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वन विभाग को हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2030 तक वन क्षेत्र को 31 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। सोमवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य का वन क्षेत्र 29.5 प्रतिशत है और इसे योजनाबद्ध व सतत तरीके से बढ़ाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुकी है और इसके प्रतिकूल प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसलिए हमारी सरकार विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।” उन्होंने वन विभाग से कहा कि प्रत्येक जिले में पौधारोपण के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान की जाए और चरणबद्ध योजना बनाई जाए। इसके साथ ही देशी प्रजातियों, फलदार और औषधीय पौधों की रोपण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मौजूदा वनों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण
सुक्खू ने जोर देते हुए कहा कि सिर्फ नए जंगलों के विस्तार पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि मौजूदा वनों की सुरक्षा भी आवश्यक है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसी दिशा में राज्य सरकार ने राजीव गांधी वन संवर्धन योजना शुरू की है। पिछले वर्ष इस योजना के तहत 924.9 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण किया गया, जिसमें 285 महिला मंडल, 70 युवक मंडल, 59 स्वयं सहायता समूह और 13 समुदाय आधारित संगठन शामिल रहे। इन समूहों को दो हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण के लिए 2.40 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और पौधों की जीवित रहने की दर के आधार पर वार्षिक प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
आगामी वर्ष में 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में इस योजना के तहत 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 3,376 हेक्टेयर की पहचान कर ली गई है, जबकि बाकी 1,624 हेक्टेयर की पहचान की प्रक्रिया जारी है। बैठक में मुख्यमंत्री ने वन विभाग की अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, पीसीसीएफ (हॉफ) संजय सूद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।