बागपत। केंद्रीय राज्य मंत्री चौधरी जयंत सिंह ने स्पष्ट किया कि मनरेगा योजना खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसके नाम और कुछ प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना को लेकर भ्रम और गलत प्रचार फैलाया जा रहा है। यह बयान उन्होंने बृहस्पतिवार को किशनपुर बराल स्थित डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित किसान सम्मान समारोह में दिया।
जयंत सिंह ने बताया कि कृषि के दो महीने के सीजन को योजना से इसलिए अलग किया गया क्योंकि किसानों ने शिकायत की थी कि इस दौरान मजदूर उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्र सरकार दोनों ही किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर हैं और उनके लिए योजनाएं लगातार बनाई जा रही हैं। गन्ना भुगतान को लेकर भी मंत्री ने कहा कि वे मिलों पर कड़ाई से नजर रख रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें, बल्कि विज्ञान और नई तकनीकों को अपनाएं।
इस अवसर पर गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने रासायनिक खेती के खतरे के बारे में आगाह करते हुए कहा कि रसायनों के अधिक उपयोग से भूमि बंजर हो रही है, लागत बढ़ रही है और उत्पादन घट रहा है। आचार्य देवव्रत ने किसानों को प्राकृतिक और तकनीकी खेती अपनाने की सलाह दी और कहा, “खेती बचेगी तो देश बचेगा। यदि बदलाव नहीं होगा तो आने वाली पीढ़ियों को उपजाऊ जमीन नहीं मिलेगी।”
कार्यक्रम में कृषि मेला भी आयोजित किया गया, जहां स्टॉल पर किसान नई तकनीक और उत्पादों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते थे। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. चौधरी अजित सिंह के नाम पर पुस्तकालय का उद्घाटन भी किया गया।