POK में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग से 5 प्रदर्शनकारियों की मौत, 20 से ज्यादा घायल

HIGHLIGHTS
- पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के रावलाकोट में गुरुवार तड़के हिंसक झड़प हुई।
- पाकिस्तानी सेना मुख्य बस टर्मिनल से संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची थी।
- गोलीबारी में पांच प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना गुरुवार सुबह करीब 5 बजे रावलाकोट के मुख्य बस टर्मिनल पहुंची थी। यहां संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ता पिछले करीब पांच महीने से धरना दे रहे थे। सेना ने धरना स्थल पर लगाए गए अवरोधों को हटाना शुरू किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी दौरान सेना की ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। बाद में शाम करीब 5 बजे सेना ने धरना स्थल खाली कराकर बस टर्मिनल पर नियंत्रण हासिल करने का दावा किया।
सेना की फायरिंग में पांच प्रदर्शनकारियों की मौत, 20 से ज्यादा घायल
जेएएसी के कार्यकर्ता फरहान आबिद ने बताया कि सैनिक सुबह होते ही धरना स्थल पर पहुंच गए थे। उनके साथ स्थानीय पुलिस के जवान भी मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर सीधे गोलीबारी शुरू कर दी।
फरहान आबिद के मुताबिक, करीब दो घंटे तक फायरिंग और टकराव जारी रहा। इस दौरान पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।
रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर ड्रोन से भी हमले का आरोप
रावलाकोट में सेना की कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों पर ड्रोन से भी हमला किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद फारूक चौक पर भी हालात तनावपूर्ण हो गए।
स्थानीय लोग बड़ी संख्या में एकत्र हुए और पाकिस्तान तथा सेना के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके अलावा डी-चौक पर भी पाकिस्तान के विरोध में प्रदर्शन किया गया। गोलीबारी की घटना के बाद शहर के कई हिस्सों में तनाव बढ़ गया है।
38 मांगों को लेकर छह महीने से चल रहा आंदोलन
रावलाकोट में जारी धरना संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहे व्यापक आंदोलन का हिस्सा है। समिति ने पाकिस्तान सरकार और पीओजेके प्रशासन के सामने 38 सूत्री मांगपत्र रखा है।
इस मांगपत्र में बिजली की ऊंची दरों से राहत देने, महंगाई पर लगाम लगाने, सस्ता राशन उपलब्ध कराने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी मांगें भी उठाई गई हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। वहीं, प्रदर्शनकारियों और सेना की कार्रवाई में मारे गए आंदोलनकारियों को आतंकी करार दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को की थी शांति बनाए रखने की अपील
पीओजेके के प्रधानमंत्री सैयद इफ्तिखार गिलानी ने मंगलवार को रावलाकोट का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जताई और स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी।
इसके बाद चार नवंबर को उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। हालांकि, इसके अगले ही दिन मुख्य बस टर्मिनल से धरना खत्म कराने के लिए पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग हुई, जिसमें पांच लोगों की मौत और करीब 20 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
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