DRDO ने किया स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण, राजनाथ सिंह ने बताया बड़ी उपलब्धि

HIGHLIGHTS
- DRDO ने गुरुवार को स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया।
- परीक्षण सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर ओडिशा तट के पास किया गया।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।
भारत ने अपनी रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और अहम सफलता हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गुरुवार को स्वदेश में विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा की।
राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर दी परीक्षण की जानकारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि गुरुवार सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर ओडिशा तट के पास स्वदेशी प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के तहत आयोजित हुआ।
उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। विभिन्न रेंज उपकरणों के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों ने भी परीक्षण की सफलता की पुष्टि की है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रलय मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का भी सफल परीक्षण
इससे पहले पिछले महीने DRDO ने स्वदेशी हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का सफल उड़ान परीक्षण किया था। इस दौरान प्लेटफॉर्म ने 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचकर लंबे समय तक समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में उड़ान भरने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रायोगिक उड़ान के दौरान यह प्लेटफॉर्म समुद्र तल से औसतन 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा। इसके बाद इसे 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक संचालित किया गया। फिर इसे जमीन पर वापस उतरने का निर्देश दिया गया।
परीक्षण के बाद सिस्टम को सुरक्षित रूप से बरामद कर लिया गया। उड़ान के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया।
निगरानी और संचार अभियानों में अहम होगी प्लेटफॉर्म की भूमिका
इस परीक्षण के जरिए समताप मंडल में लंबे समय तक काम करने की प्लेटफॉर्म की क्षमता साबित हुई। यह क्षेत्र निगरानी, संचार और मॉनिटरिंग से जुड़े अभियानों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
उड़ान के दौरान एयरबोर्न प्लेटफॉर्म से ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक रियल टाइम वीडियो और विमान के प्रदर्शन से संबंधित आंकड़े लगातार भेजे गए।
अधिकारियों के मुताबिक, सिस्टम में इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, GPS रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रित करने वाले उपकरणों समेत कई इंस्ट्रूमेंटेशन और कंट्रोल पैकेज लगाए गए थे। मिशन के दौरान सभी सब-सिस्टम ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।
कई एजेंसियों के समन्वय से पूरा हुआ परीक्षण
हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम का उड़ान परीक्षण भारतीय वायुसेना, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्दिनेस एंड सर्टिफिकेशन, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और अन्य नागरिक एजेंसियों के आपसी समन्वय से पूरा किया गया।
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