फारूक अब्दुल्ला के बयान पर जम्मू में बवाल, भाजपा समेत कई संगठन सड़कों पर उतरे

HIGHLIGHTS
- बारामुला में फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताया था।
- राष्ट्रीय बजरंग दल, VHP और डोगरा फ्रंट समेत कई संगठनों ने विरोध मार्च निकाला।
- भाजपा सांसद सती शर्मा ने देश के 140 करोड़ लोगों से माफी मांगने की बात कही।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को लेकर दिए गए बयान के विरोध में सोमवार को जम्मू में कई जगह प्रदर्शन हुए। भाजपा नेताओं और विभिन्न संगठनों ने बयान की आलोचना करते हुए उनसे माफी मांगने की अपील की। कुछ नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग भी की।
बारामुला में फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा कर रहा है। इस टिप्पणी के बाद भाजपा नेताओं और कई संगठनों ने नाराजगी जाहिर की। राष्ट्रीय बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता युवा मोर्चा, डोगरा फ्रंट और नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट सहित कई संगठनों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने फारूक अब्दुल्ला के पुतले भी जलाए।
भाजपा नेताओं ने बयान की आलोचना की
भाजपा की राज्यसभा सांसद सती शर्मा ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को देश के 140 करोड़ लोगों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वह माफी नहीं मांगते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान में रहने के बारे में सोचना चाहिए।
भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को राष्ट्रविरोधी बताते हुए कहा कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला ऐसे देश के समर्थन में बोल रहे हैं, जिस पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अशांति को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र रैना ने भी बयान पर आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की।
भाजपा नेता शक्ति राज परिहार ने फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग उठाई। वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विवेक बाली ने बयान की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने भी बयान पर दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता रविंद्र शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को बोलने का अधिकार नहीं है। शर्मा ने शिमला समझौते का हवाला देते हुए कहा कि द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।
उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के बयान में उठाए गए कुछ मुद्दों का भी उल्लेख किया, जिनमें क्षेत्र में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय का विषय शामिल है। इसके साथ ही शर्मा ने जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने की मांग भी दोहराई।
विभिन्न संगठनों ने जांच की मांग उठाई
नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष विशाल चोपड़ा के नेतृत्व में भी प्रदर्शन किया गया। संगठन ने फारूक अब्दुल्ला से अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा।
दूसरी ओर, जम्मू स्टेट मूवमेंट ने सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर विजय सागर धेवान की अध्यक्षता में बैठक की। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की अपील की।
जम्मू स्टेट मूवमेंट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत संभावित कार्रवाई के पहलू की जांच करने की मांग भी की। हालांकि, किसी भी कानूनी कार्रवाई पर फैसला जांच और संबंधित कानूनों के प्रावधानों के आधार पर ही किया जाना है।
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