यूपी के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 30 दिन के बोनस को योगी सरकार की मंजूरी

HIGHLIGHTS
- बोनस के लिए 31 मार्च 2026 तक एक वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करना जरूरी है।
- बोनस की 75 प्रतिशत राशि GPF खाते में जमा होगी और 25 प्रतिशत का नकद भुगतान किया जाएगा।
- GPF के सदस्य नहीं होने वाले कर्मचारियों को NSC या PPF के रूप में राशि मिलेगी।
शासनादेश में बोनस पाने के लिए पात्रता की शर्तें और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। इसके तहत पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों को बोनस दिया जाएगा, जिनका पद वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8 (47,600 से 1,51,100 रुपये) या पुराने वेतनमान में 4,800 रुपये तक के ग्रेड पे के अंतर्गत आता है। वहीं, एसीपी के तहत इससे अधिक वेतन लेवल प्राप्त करने वाले कर्मचारी भी बोनस के पात्र होंगे।
हालांकि, इस लाभ के लिए जरूरी है कि संबंधित कर्मचारी ने 31 मार्च 2026 तक लगातार एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो।
कर्मचारियों को बोनस का भुगतान किस तरह किया जाएगा?
सरकार ने बोनस की रकम के भुगतान के लिए नकद और बचत का संयुक्त फॉर्मूला निर्धारित किया है। इसके तहत कुल बोनस का 75 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते में जमा किया जाएगा, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि का नकद भुगतान किया जाएगा।
ऐसे कर्मचारी जो भविष्य निधि के सदस्य नहीं हैं, उन्हें बोनस की राशि नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) के रूप में दी जाएगी।
वहीं, 31 मार्च 2026 के बाद सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों और 30 अप्रैल 2027 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों को विशेष राहत दी गई है। ऐसे कर्मचारियों को बोनस की पूरी 100 प्रतिशत राशि नकद दी जाएगी।
किन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा बोनस?
शासनादेश में बोनस के लिए कुछ प्रतिबंध भी निर्धारित किए गए हैं। इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-2026 के दौरान किसी कर्मचारी को विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मुकदमे में दंडित किया गया है तो वह बोनस का लाभ नहीं उठा सकेगा।
इसके अलावा जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच या आपराधिक मुकदमा अभी लंबित है, उनका बोनस जांच और मुकदमे का अंतिम परिणाम आने तक रोक दिया जाएगा।
हालांकि, यदि संबंधित कर्मचारी जांच या मुकदमे में दोषमुक्त हो जाता है तो उसे रोके गए सभी वर्षों का बोनस दिया जाएगा।
बोनस की गणना कैसे होगी और अधिकतम कितनी मिलेगी रकम?
सरकार ने तदर्थ बोनस की गणना के लिए कर्मचारियों की अधिकतम मासिक परिलब्धियों की सीमा 7,000 रुपये निर्धारित की है। गणना में एक महीने के औसत दिनों की संख्या 30.4 मानी जाएगी।
इस आधार पर पात्र कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये का बोनस मिल सकेगा।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को कितना मिलेगा बोनस?
सरकार के इस फैसले में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं।
छह कार्य दिवसों वाले सप्ताह के तहत आने वाले कार्यालयों में लगातार कम से कम तीन वर्षों से काम कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भी बोनस के हकदार होंगे। इसके लिए जरूरी है कि उन्होंने प्रत्येक वर्ष कम से कम 240 दिन काम किया हो।
ऐसे कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक परिलब्धि 1,200 रुपये निर्धारित की गई है। इस हिसाब से उन्हें 1,184 रुपये का बोनस दिया जाएगा।
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