टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद शूटर्स ने हैंडलर्स को भेजा था मैसेज, बोले- ऑपरेशन पूरा हुआ

HIGHLIGHTS
- सूत्रों का दावा है कि हमले के लिए आरोपियों को अग्रिम रकम दी गई और बाद में अतिरिक्त भुगतान का वादा किया गया।
- सोशल मीडिया पर सामने आई ऑडियो क्लिप में एक व्यक्ति ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
- पुलिस दो आरोपियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच के जरिए संपर्कों और संभावित रेकी के सबूत तलाश रही है।
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में जांच जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि वारदात को पहले से योजना बनाकर अंजाम दिया गया था। इस साजिश में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े कथित हैंडलर्स की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी घटना से पहले और उसके बाद भी अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे। वे उन्हें हमले से संबंधित जानकारी दे रहे थे और उनसे आगे के निर्देश प्राप्त कर रहे थे।
राजस्थान के कोटा से तीन आरोपी गिरफ्तार
इस मामले में सोमवार को राजस्थान के कोटा से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उनकी पहचान बिहार और हरियाणा के निवासियों के रूप में हुई है। ऋतिक उर्फ रोशन बिहार के बेगूसराय का रहने वाला है, जबकि रेहान और फूल सिंह हरियाणा के निवासी हैं। तीनों पर हत्या के प्रयास का आरोप है।
मुंबई पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को सड़क मार्ग से मुंबई लाया गया है। मेडिकल जांच के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। मामले की जांच एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही है।
वारदात के दौरान हैंडलर्स के संपर्क में थे आरोपी
सूत्रों का कहना है कि हमले के दौरान आरोपी लगातार अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे। कथित तौर पर वारदात के बाद बाइक से फरार होते ही हमलावरों ने उन्हें सूचना दी कि काम पूरा हो गया है।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कथित हैंडलर अनिल पंडित और उसके साथियों ने मीडिया में गोलीबारी की खबर आने का इंतजार किया। घटना की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने हमले की पुष्टि की। इसके बाद पहले से तैयार फेसबुक पोस्ट और एक ऑडियो क्लिप जारी की गई।
पुलिस को संदेह है कि गोली चलाने से पहले हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ का फुटबॉल खेलते हुए एक छोटा वीडियो अपने हैंडलर्स को भेजा था। सूत्रों के मुताबिक, वीडियो मिलने के बाद ही हैंडलर्स ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी थी।
इस वारदात को अंजाम देने के लिए तीनों आरोपियों को अग्रिम भुगतान के रूप में कुल 50 हजार रुपये दिए गए थे। इसके अलावा, काम पूरा होने पर उन्हें और रकम देने का वादा किया गया था।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने की आशंका
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को संदेह है कि अनिल पंडित जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी है और हैंडलर्स के नेटवर्क के जरिए इस साजिश से जुड़ा हुआ था। कथित हमले की कोशिश के बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिसमें एक व्यक्ति ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
रिकॉर्डिंग में बोलने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अनिल पंडित बताया और हरमन संधू के साथ मिलकर हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा, 'मैं अनिल पंडित हूं। मैं लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई हूं। आज टाइगर श्रॉफ के साथ जो कुछ भी हुआ, उसकी जिम्मेदारी हम लेते हैं - हरमन संधू और मैं।'
ऑडियो में दावा किया गया कि टाइगर श्रॉफ को समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्होंने बात नहीं समझी। रिकॉर्डिंग में सलमान खान से जुड़े लोगों को भी धमकी दी गई।
क्लिप में बोलने वाले व्यक्ति ने कहा, 'पूरी फिल्म इंडस्ट्री में, जो कोई भी हमारे साथ जुड़े बिना काम करेगा, या सलमान खान के साथ काम करेगा, उसे मार दिया जाएगा। यह पहली और आखिरी चेतावनी है।'
अनिल पंडित के संपर्क में कैसे आया रेहान?
आरोपियों से शुरुआती पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को कई अहम जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के मुताबिक, करीब दो महीने पहले रेहान और उसके साथी फूल सिंह ने अमृतसर में एक कारोबारी को डराने-धमकाने के लिए उस पर गोलीबारी की थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी घटना के बाद रेहान, अनिल पंडित के संपर्क में आया।
सूत्रों का दावा है कि बाद में पंडित ने टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के लिए रेहान को 35 हजार रुपये अग्रिम दिए थे। बाकी रकम हमले के बाद देने का वादा किया गया था। उसने रेहान को विदेश भेजने में मदद करने की बात भी कही थी।
अधिकारियों के मुताबिक, रेहान ने इस हमले में शामिल होने के लिए ऋतिक को 35 हजार रुपये और विदेश में नौकरी दिलाने का लालच दिया था।
आरोपियों के पास से कपड़े और मोबाइल फोन बरामद
जांच के दौरान आरोपियों के पास से एक बैग मिला, जिसमें तीनों के लिए कपड़े रखे हुए थे। जांचकर्ताओं ने दो आरोपियों के पास से एक-एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है। तीसरे आरोपी ने कथित तौर पर घटना के बाद सफर के दौरान अपना फोन फेंक दिया था।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना चाहती है। इसके जरिए पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हमले से पहले आरोपियों ने किन स्थानों की रेकी की थी और इस दौरान कौन-सी तस्वीरें या वीडियो बनाए थे।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि बिश्नोई गैंग के किन सदस्यों के साथ ये तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए थे तथा इन्हें भेजने के लिए किन एप्लिकेशन का इस्तेमाल हुआ था।
अधिकारियों को उम्मीद है कि आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वारदात से पहले और बाद में वे अपने हैंडलर्स के कितने संपर्क में थे।
सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल
मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पुलिस की टीमें पिछले कई हफ्तों से फुटबॉल ग्राउंड और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही हैं। इसका उद्देश्य आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि उन्होंने हमले से पहले इलाके की रेकी की थी या नहीं।
जांचकर्ताओं का कहना है कि कुछ फुटेज में कथित तौर पर आरोपी इलाके की निगरानी करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इन फुटेज के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान करने की भी कोशिश कर रही है, जो घटना से पहले मैदान में आए हो सकते हैं।
इसके साथ ही जांचकर्ता टाइगर श्रॉफ की दिनचर्या और उन लोगों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, जिन्हें उनकी गतिविधियों, खासकर सार्वजनिक कार्यक्रमों और इवेंट्स के शेड्यूल की जानकारी हो सकती थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या ऐसी जानकारी का इस्तेमाल हमले की योजना बनाने में किया गया था।
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